गणतंत्र दिवस पर निबंध Essay On 26 January Republic Day in Hindi

Republic day Essay in hindi सभी देशों में राष्ट्रीय पर्व का महत्व कुछ और ही रहता है. वैसे भी भारत गांवों का देश के साथ त्योहारों का भी देश है. गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर सस्चूली बच्चों को 26 January Essay in Hindi लिखने को दिया जाता है. पहले तो हमारे पास निबंध की कई किताब होती थी. वहाँ से कुछ पढ़ कर लिख लेते थे. लेकिन समय के साथ किताब की जगह इन्टरनेट पर Essay भी मिल जाता है. इस पोस्ट में गणतंत्र दिवस निबंध  लिखा गया है. यह निबंध एक स्कूल में पढ़ रहे बच्चें ने भेजा है. जिसे यहाँ पब्लिश किया गया है. हमारी ब्लॉग Guruji Tips पर Guest Post लिखने के लिए संपर्क कर सकते हैं.

दोस्तों अगर आप चाहे तो इस आर्टिकल को याद करके आने वाले गणतंत्र दिवस के दिन याद कर के अपने स्कूल में या कॉलेज में 26 january Republic day eassy in hindi के रूप में बोल और लिखे सकते हैं ! 26 January speech in hindi या Republic Day Hindi Shayari भी पब्लिश किया जा चुका है. उम्मीद है. 26 January से जुड़ा सभी जानकारी इस ब्लॉग पर मिल जायेगा. यदि कुछ और जानकारी चाहिए तो कमेंट में पूछ सकते हो.

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Republic Day Essay in Hindi

निबंध का मतलब किसी विषय पर क्रमबद्ध रूप से लिखा गया रचना. “निबंध” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है नि और बंध. इसका अर्थ है भली प्रकार से बंधी हुई रचना. कहने का मतलब वह रचना जो विचारपूर्वक, क्रमबद्ध रूप से लिखी गई हो. निबंध की भाषा विषय के अनुकूल होती है. भाषा और शब्दों के अच्छे प्रयोग से ही भावों विचारों और अनुभवों को प्रभावशाली तरीके से व्यक्त किया जा सकता है और यही निबंध है. किसी भी निबंध को चार भाग में लिखा जाता है.

  1. शीर्षक
  2. प्रस्तावना
  3. विस्तार
  4. उपसंहार

आचार्य शुक्ल के अनुसार यदि गद्य कवियों को कसौटी है, तो निबंध गद्य की.

बाबू गुलाब राय के अनुसार निबंध का आकार सीमित होता है, उसमें निजीपन होता है, स्वच्छ और सजीव होता है.

पं.श्यामसुंदर दास निबंध वह लेख है जिसमें किसी गहन विषय पर विस्तारपूर्वक और पाण्डित्यपूर्व ढंग से विचार किया गया हो.

Gantanra Diwas Bhashan in Hindi भी पब्लिश किया गया है आप वहाँ से भी आईडिया ले सकते हो. क्यूंकि, निबंध का मतलब विचार से है. तो गणतंत्र दिवस पर आपके क्या विचार हैं? इसीलिए यदि आपको गणतंत्र दिवस पर लेख लिखना है तो कई जगह से पढ़ें और फिर उसे अपनी भाषा में लिखने का प्रयास करें. साल 2019 में भारत को गणतंत्र बने 70 साल होगया. गणतंत्र दिवस के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब सभी झांकियों की थीम एक विषय पर है. देशवाशियों को हम सभी की तरफ से गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई.

यहाँ Republic Day Essay In Hindi कई परा ग्राफ में पब्लिश किया गया है, जो 1500, 1000, 700, 500, 250 शब्दों में लिखा गया है. आपको जिस 26 January Essay की जरूरत है उसका इस्तेमाल कर सकते हैं या इन सब से एक अलग लेख भी लिख सकते हो.

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26 January Essay in Hindi (1500 Words)

कुछ भी लिखने से पहले मैं रेनू यादव गुरूजी टिप्स के फाउंडर आशुतोष चौधरी का धन्यवाद देती हूँ. सर अभी तक तो मैं कॉपी में लिखती थी. लेकिन, पहली बार गुरूजी टिप्स ब्लॉग पर लिख रही हूँ. हो सकता है इसमें कुछ गलतियाँ हो सकती है. कृपया उन्हें नज़रंदाज़ कर मेरी गलतियों के लिए मुझे माफ़ कर दें. Gantantra Diwas Essay in Hindi 15 August 1947 में हम आज़ाद जरूर हो गए लेकिन, 26 जनवरी 1950 में हमारे गणतंत्र का निर्माण हुआ. इसी दिन भारतीय संविधान ने शासकीय दस्तावेजों के रुप में भारत सरकार के अधिनियम 1935 का स्थान ले लिया. भारत सरकार द्वारा इस दिन को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया. त्योहारों का देश होने की वजह से यहाँ सभी त्यौहार कई तरीके से मनाया जाता है. लेकिन, राष्ट्रिय पर्व लगभग सभी जगह एक ही तरीके से मनाया जाता है. इस दिन खास कर स्कूल कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. जिसमें कई कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. मेरे स्कूल में गणित प्रतियोगिता, सुई धागा प्रतियोगिता, Republic Day Speech In Hindi, NCC Dreel, के अलावे Republic Day Song भी कुछ बच्चें गाते हैं. इस दिन भारत के राष्ट्रपति के समक्ष नई दिल्ली के राजपथ (India Gate) पर परेड का आयोजन किया जाता है.

Republic Day History In Hindi कई सालों (200 साल) तक हमारा देश अंग्रेजों (ब्रिटीश हुकूमत) के अधीन रही. गुलाम का मतलब तो आप समझ ही सकते हो. जब एक कंपनी का एम्प्लोयी कंपनी के अनुसार ही रहता है तो यहाँ तो गुलामी की बात हो रही है. उस वक़्त भारतीय लोग ब्रिटीश शासन द्वारा बनाये गये कानूनों को मानने के लिये मजबूर थे. लेकिन, भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा लंबे संघर्ष के बाद वो दिन आया जब 15 अगस्त 1947 के भारत आजाद हो गया और इस दिन को भारतीय इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया. आजादी के बाद भी हमारे देश का कोई कानून नहीं था. लगभग ढाई साल बाद देश ने अपना संविधान लागू किया और खुद को लोकतांत्रिक गणराज्य के रुप में घोषित किया. 2 साल 11 महीने और 18 दिन के बाद 26 जनवरी 1950 को हमारी सांसद द्वारा भारतीय संविधान को पास किया गया. खुद को लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करने के दिन से ही हम सभी भारतवाशी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रुप में मनाने लगे.

हर जगह इसकी महत्ता अलग – अलग है. खासकर शिक्षण संस्थानों में इसे बहुत ही उत्साह पूर्वक मनाया जाता है. इस दिन शिक्षण संस्थानों में कई कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. कई स्कूल जहाँ NCC (National Cadet Core) है वहाँ इस दिन परेड भी होती है साथ ही एक महीने पहले से NNC टीचर उन छात्रों के ड्रील का प्रैक्टिस शुरू करवा देते हैं. कई छात्र और छात्राओं को पुरुस्कार तथा प्रमाण पत्र आदि से सम्मान किया जाता है. मुझे तो सबसे अच्छा जिलेबी खाना लगता है. एक तो यह हमारा राष्ट्रिय मिठाई है और दूसरा मुझे अच्छा लगता है. वैसे तो पर्व त्यौहार पर छुट्टी के नाम से छात्र खुश हो जाते हैं. लेकिन बहुत ही अजीब बात है. राष्ट्रिय पर्व और छुट्टी होने के बावजूद भी हम इस दिन स्कूल जाते हैं. इस दिन की ख़ुशी कुछ अलग ही रहती है. यदि हमें किसी प्रतियोगिता में भाग लेना होता है तो एक महीने पहले से हम उसकी तयारी में जुट जाते हैं. क्यूंकि, सिर्फ कार्यक्रम में भाग लेना नहीं बल्कि, पुरुस्कार लेना हमारा मकसद होता है. प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले को भी इस दिन छुट्टी मिलता है. जिससे उन्हें अपने परिवार और बच्चों के साथ समय बिताने का मौका मिल जाता है.

दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी एक महीन पहले से ही शुरु हो जाती है और किसी तरह की अपराधिक घटना को होने से पहले रोका जा सके इसलिए इस दौरान सुरक्षा कारणों से इंडिया गेट पर लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी जाती है.इससे उस दिन वहाँ मौजूद लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो जाती है. देश की राजधानी दिल्ली में इस उत्सव पर खास प्रबंध किया जाता है, कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रपति द्वारा झंडोतोलन और राष्ट्रगान के साथ होता है. इसके बाद तीनों सेनाओं द्वारा परेड, राज्यों की झाकियोँ की प्रदर्शनी, पुरस्कार वितरण, मार्च पास्ट आदि क्रियाएँ होती है, और अंत में पूरा वातावरण “जन गण मन गण” से गूँज उठता है. सभी के लिए राजपथ जाना मुश्किल है. मैं भी अभी तक राजपथ नहीं गई हूँ, लेकिन दूरदर्शन पर सुबह से ही कार्यक्रम पराश्रित किया जाता है. इस दिन देश की संविधान, देश की समरसता और शांति को बनाए की याद दिलाई जाती है. जिसे हम सभी को याद रखना चाहिए.

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2019 में गणतंत्र हुए 70 साल हो गया है. लेकिन यह सोचने वाला विषय है क्या हम सच में अपने अधिकार और कर्तव्य को जानते हैं? हमारा संविधान हमें कुछ अधिकार तो दिया ही है. लेकिन, अधिकार के साथ हमारा कुछ कर्तव्य भी है. देश में कई ऐसे लोग हैं जिन्हें अपना अधिकार ही नहीं पता है तो कर्तव्य तो उनके लिए बहुत दूर है. आज भी हमारे देश में गरीबी और बेरोजगारी की समस्या बनी हुई है. इसके लिए जिम्मेदार कौन है. यह कहना बहुत मुश्किल है. एजुकेशन सिस्टम या सरकार या खुद हम आखिर कौन है जिम्मेदार? आजादी के बाद से ही सरकार एक ही वादा कर रही है.

  • हमारी सरकार आई तो गरीबी मिटा देंगें. लेकिन गरीब ही मिट जाते हैं.
  • हमारी सरकार आई तो 24 घंटे बिजली मिलेगी
  • रोजगार दिया जायेगा.

यदि इन पोलिटिकल पार्टी का मेनिफेस्टों देख लो तो ऐसा लगता है जैसे अब देश में न ही कोई गरीब होगा न ही किसी चीज़ की समस्या होगी लेकिन विडंबना यह है कि एक बार जीत जाने वाला जन प्रतिनिधि जीवन भर के लिए के पैसे तो कर ही लेता है साथ ही अगले दो से तीन चुनाव के लिए पैसे भी जोड़ लेता है. देश की लोकतान्त्रिक व्यवस्था का बहुत बुरा हाल हो चुका है. लेकिन इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाये इसके बारें में भी कुछ कहना बहुत मुश्किल है. क्यूंकि, हमारा यह स्वभाव है की, हम सामने वाले को ईमानदार देखना चाहते हैं. लेकिन यदि खुद को मौका मिले तो ईमानदारी नहीं दिखाना चाहते हैं. जब तक हम इस दोहरे मानसिकता में जियेंगें तब तक विकास संभव नहीं है. एक कहावत है. हम सुधरेंगें जग सुधरेगा जिसे हम सिर्फ बोलते हैं. लेकिन हम करते क्या है? जग सुधरेगा हम सुधरेंगें. जो कि संभव नहीं है.

एक प्रश्न बहुत विचारनीय है इसका उत्तर कमेंट में जरूर देना खुद को बदलना, सुधारना ज्यादा आसान है या किसी दूसरे को? तो फिर क्यूँ हम दूसरों को सुधरने में लगे रहते हैं? दूसरों से इक्षा रखने वाला हमेशा दुखी रहता है. इसीलिए हमें खुद से उम्मीद रखनी चाहिए. आज देश में बेरोजगारी की समस्या इस कदर बढ़ गई है जिसके बारें में कुछ कहा नहीं जा सकता है. कुछ जगहों पर तो लगता है सरकारी नौकरी लोग उपरी कमाई के लिए ही करना चाहते हैं. देश में ऐसी कई समस्याएँ हैं जो आज 70 साल बाद भी दूर छोड़ो कम नहीं हो पाया है. ऐसे में क्या सही और क्या गलत इसका फर्क ही हम भूल जाते हैं. देश की वव्यवस्था को सही से चलने के लिए समाज का शिक्षित होना बहुत जरूरी है. जब तक समाज शिक्षित नहीं होता हम आगे का कुछ भी नहीं सोच सकते हैं. एक शिक्षित समाज से ही संगठित राष्ट्र का निर्माण हो सकता है. हमारे देश में स्त्रियों और बेटियों को समान दर्जा मिला है क्या? क्या सरकार ने इस दिशा में कई ठोस पहल किया हैं. यदि किया तो उससे कोई फर्क हुआ है या नहीं? लेकिन, बेटी बचाओ और बेटी पढ़ों जैसी योजनायें बालिकाओं के विकास में सरकार की एक महत्वपूर्ण कदम है.

आजादी और गणतंत्र हुए इतने साल हो गई लेकिन सरकार अभी तक देश के कोने कोने तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंचा पाई है. इसमें सरकार और जानता दोनों ही बराबर रूप से जिम्मेदार है. कुछ जगह तो हमें अपने अधिकारों से वंचित ही रखा जाता है. भारतीय सुरक्षा व्यवस्था का हाल तो कुछ ऐसा है की कोई भी काम कर सकते हो बस मुनाफा में पुलिस स्टेशन का भी हिस्सा होना चाहिए. अब देश की सेना के कन्धों पर कितना भार दिया जाये. कई ऐसे गोरख धंधे चल रहे हैं जो पुलिस वालों की निगरानी में चल रही है. इसके लिए कौन जिम्मेदार है. राष्ट्रीय राजमार्ग (Highway) पर वाइन शॉप खोलने का लाइसेंस दिया जाता है और फिर पुलिस वाले ड्रिंक एंड ड्राइव के केस में उसे पकड़ लेते हैं. अब इसमें किसकी गलती है? क्या आप कुछ बता सकते हैं? जिससे आगे खतरा हो सकता है उसे पहले ही क्यूँ नहीं रोका जाता है? इसके साथ ही आज हमारे देश को तोड़ने के लिए कई विदेशी शक्तियां लगातार सक्रिय हैं. आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं का हमने डटकर सामना किया है. इस खास अवसर पर सभी देशवासी यह कसम खाते हैं, कि अपने तिरंगे की शान बचाने के लिए किसी भी तरह के बलिदान के लिए तैयार रहेंगे. इस पावन अवसर पर देश की सुरक्षा में लगे और इसके लिए अपनी शहादत देने वाले सभी सैनिकों को भी देशवासी याद कर विजय चौक पर फूल माला अर्पित करते हैं.

मैं सिमरन सिंह आप सभी से उम्मीद करती हूँ यह निबंध आपको जरूर पसंद आई होगी यदि मुझे पुरुस्कार देना चाहते हो तो इसे अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें और कमेंट में मुझे जरूर बताएं हमारा निबंध Republic Day Essay in Hindi को आप कितना रेटिंग दोगे.

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Republic Day Essay in Hindi (1000 Words)

26 January Essay in Hindi यह लेख सुधांशु कुमार ने नई दिल्ली से भेजा है जो एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं.

अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार भारत में गणतंत्र दिवस 26 जनवरी साल का पहला राष्ट्रिय पर्व है. 26 January, 1950 में 2 वर्ष 18 महीने 11 महीने बाद हमारा संविधान तैयार कर लागु किया गया और उस दिन से ही हम इसे बड़े धून धाम से माना रहे हैं. जब से हमारे देश का संविधान प्रभाव में आया हम गणतंत्र दिवस माना रहे हैं. गणतंत्र दिवस का दिन भारत के तीन राष्ट्रीय पर्वों में से एक है, यहीं कारण है कि इसे भारत क हर व्यक्ति देशभक्ति से साथ मनाता है. 26 जनवरी के दिन मनाये जाने वाले गणतंत्र दिवस के पर्व पर पूरे देश भर में परेड तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इसलिए यह काफी आवश्यक है कि इस विशेष दिन को हम उचित सम्मान दें और इसे साथ मिलकर मनाये, ताकि हमारे देश की यह एकता और अखंडता इसी प्रकार से बनी रहे.

गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं?

आजादी के बाद भी हम किसी और देश का संविधान को मान रहे थे. लेकिन इस दिन देश के कुछ महान लोगों की देख रेख में भारत का अपना संविधान लिखा गया और 26 January, 1950 से यह लागू किया गया. हालांकि इसके अलावा इस दिन का एक और इतिहास भी है, जिसे शायद बहुत कम लोग जानते हैं, इसकी शुरुआत सन 1929 के दिसंबर से हुआ था. इस दिन लाहौर में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित नेहरु के अध्यक्षता में संपन्न हुई. जिसमें कांग्रेस द्वारा इस बात की घोषणा की गई की यदि 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्त शासन (Dominion State) नहीं बनाया गया तो इसके बाद भारत अपने आप को पूर्णतः स्वतंत्र घोषित मन लेगा. लेकिन, जब यह दिन आया और अंग्रेजी सरकार द्वारा इस मुद्दे पर कोई जवाब नही दिया गया तो कांग्रेस ने उस दिन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्ति के लक्ष्य से अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ कर दिया. यही कारण है कि जब हमारा देश आजाद हुआ तो 26 जनवरी का दिन ही संविधान स्थापना के लिए चुना गया.

गणतंत्र दिवस समारोह

हर वर्ष 26 जनवरी के दिन देश की राजधानी नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस के इस कार्यक्रम को काफी भव्य रूप से मनाया जाता है. इसके साथ ही गणतंत्र दिवस के दिन किसी विशेष विदेशी अतिथि को आमंत्रित करने की भी प्रथा रही है, कई बार इसके अंतर्गत एक से अधिक अतिथियों को भी आमंत्रित किया जाता है. इस दिन सर्वप्रथम भारत के राष्ट्रपति द्वारा तिरंगा फहराया जाता है और इसके बाद वहां मौजूद सभी लोग सामूहिक रूप से खड़े होकर राष्ट्रगान गाते हैं.

झंडोतोलन के बाद कई तरह की सांस्कृतिक और पारंपरिक झांकिया निकाली जाती हैं, जिसमें भारत की अलग अलग सभ्यता और संस्कृति को देखि जा सकती है. सच मायने में इस दिन हमें देश की सभ्यता और सांस्कृति को जानने का मौका मिलता है. इसके साथ ही इस दिन का सबसे विशेष कार्यक्रम परेड का होता है, जिसे देखने के लिए लोगों में काफी उत्साह होता है. सभी के लिए इंडिया गेट पर जाना संभव भी नहीं है और यदि सभी यहाँ पहुच गए तो शायद उम्मीद से ज्यादा भीड़ हो जाएगी वैसे भी यहाँ उम्मीद से ज्यादा भीड़ होती है. परेड का आरंभ प्रधानमंत्री द्वारा राजपथ पर स्थित अमर जवान ज्योति पर पुष्प डालने के पश्चात होता है. इसमें भारतीय सेना के विभिन्न रेजीमेंट, वायुसेना तथा नौसेना द्वारा हिस्सा लिया जाता है. कार्यक्रम के अंत में तीन रंगों(केसरिया, सफेद, और हरा) के फूलों की बारिश वायु सेना द्वारा की जाती है जो आकाश में राष्ट्रीय झंडे का चिन्ह् प्रदर्शित करता है। शांति को प्रदर्शित करने के लिये कुछ रंग-बिरंगे गुब्बारों को आकाश में छोड़ा जाता है.

यह वह कार्यक्रम होता है, जिसके द्वारा भारत अपने सामरिक तथा कूटनीतिक शक्ति का भी प्रदर्शन करता है और विश्व को यह संदेश देता है कि हम अपने रक्षा में सक्षम है. इस कार्यक्रम में कई देश के प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया जाता है. गणतंत्र दिवस समारोह का यह कार्यक्रम भारत की विदेश नीती के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस कार्यक्रम में आमंत्रित किये गये विभिन्न देशों के मुख्य अतिथियों के आगमन से भारत को इन देशों से संबंधों को बढ़ाने का मौका मिलता है.

भारत का राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस राष्ट्रिय पर्व है और राष्ट्रिय पर्व किसी भी राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा पर्व होता है. Gantantra Diwas भारत देश और देशवाशियों के लिए कोई साधरण दिन नही है, यह वह दिन है जब हमारे देश को पूर्ण रूप से स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई क्योंकि भले ही भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया था, लेकिन यह पूर्ण रुप से स्वतंत्र तब हुआ जब 26 जनवरी 1950 के दिन ‘भारत सरकार अधिनियम’ को हटाकर भारत के नवनिर्मित संविधान को लागू किया गया. यह भारत के तीन राष्ट्रीय पर्वों में से एक है इसके अलावा अन्य दो गांधी जयंती और स्वतंत्रता दिवस है.

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इस दिन पूरे देश भर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है, लेकिन फिर भी शैक्षणिक संस्थानों में इस दिन भर का कार्यक्रम रहता है. यहाँ छात्र और शिक्षक कई तरह का सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ देश के लिए कुछ कर गुजरने वाले लोगों की याद करते हैं. कई जगहों पर झंडोतोलन के बाद लोग अपने घर आ जाते है तो राष्ट्रिय पर्व होने की वजह से इस दिन नौकरी पेशा वाला अपने परिवार और बच्चों के साथ समय बीता पता है. इस राष्ट्रिय पर्व पर ही हम राष्ट्रिय मिठाई का भी स्वाद चख पाते हैं. इस दिन का सबसे भव्य आयोजन नई दिल्ली के राजपथ में होता है, जहां कई तरह की झांकिया और परेड निकाले जाते हैं. गणतंत्र दिवस का यह दिन एक ऐसा दिन होता है, जो हमें हमारे देश के संविधान का महत्व समझाता है, यहीं कारण है कि इस दिन को पूरे देश भर में इतने धूम-धाम से मनाया जाता है.

गणतंत्र दिवस से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे.
  • गणतंत्र दिवस परेड के दौरान एक क्रिस्चियन ध्वनि बजाई जाती है, जिसका नाम “अबाईड वीथ मी” है क्योंकि यह ध्वनि महात्म गांधी के प्रिय ध्वनियों में से एक है.
  • इस दिन पहली बार 26 जनवरी 1930 में पूर्ण स्वराज का कार्यक्रम मनाया गया, जिसमें अंग्रेजी हुकूमत से पूर्ण आजादी के प्राप्ति का प्रण लिया गया था.
  • भारतीय गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान भारत के राष्ट्रपति को 31 तोपों की सलामी दी जाती है.
  • गणतंत्र दिवस समारोह का राजपथ में पहली बार आयोजन वर्ष 1955 में किया गया था.

गणतंत्र दिवस की शुभकामना

गणतंत्र दिवस हमारे देश के तीन राष्ट्रीय पर्वों में से एक है, यह वह दिन है जो हमें हमारा गणतंत्र के महत्व का अहसास कराता है. यहीं कारण है कि इसे पूरे देश भर में इतने जोश तथा उत्साह के साथ मनाया जाता है. इसके साथ ही यह वह दिन भी है जब भारत अपने सामरिक शक्ति का प्रदर्शन करता है, जो किसी को आतंकित करने के लिए नही अपितु इस बात का संदेश देने के लिए होता है कि हम अपनी रक्षा करने में सक्षम है. 26 जनवरी हमारे देश के लिए एक ऐतहासिक पर्व है इसलिए हमें पूरे जोश तथा सम्मान के साथ इस पर्व को मनाना चाहिए.

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Republic Day Essay in Hindi (700 Words)

26 January Essay in Hindi यह लेख अवनीश राज ने अररिया, बिहार से भेजा है जो लोकल ट्रिक्स (Local Trix) के नाम से एक ब्लॉग पर लिखते हैं.

Republic Day / 26 January / गणतंत्र दिवस यह भारत देश की तीन राष्ट्रीय पर्व में से एक है. आज ही के दिन 26 जनवरी 1950 में हमारा संविधान लागु किया गया और भारत को एक  गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित किया गया. इस दिन हम यही ख़ुशी एक दूसरे के साथ बांटते हैं. इस दिन स्वतंत्र भारत नया संविधान अपनाकर नए युग का सूत्रपात किया गया था. यह हम सभी देशवाशियों के लिए स्वाभिमान का दिन है. संविधान के अनुसार डॉ. राजेन्द्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने और पहली बार गणतंत्र दिवस समारोह मनाया गया. तब से 26 जनवरी को हर वर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है और आगे नही मनाया जाते रहेगा. गणतंत्र दिवस भारत के लिए गौरवमय दिन है. इस दिन देश भर में विशेष कार्यक्रम होते हैं. सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में झंडोतोलन का कार्यक्रम किया जाता है. इसके साथ ही कुछ जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है. बच्चे इनमें बहुत उत्साह से भाग लेते हैं. खास्खर प्रभात फेरी के बाद मिलने वाला जिलेबी का स्वाद मन खुश कर देता है. स्कूली बच्चे जिला मुख्यालयों, प्रांतों की राजधानियों तथा देश की राजधानी के परेड में भाग लेते हैं. विभिन्न स्थानों में सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती हैं. लोकनृत्य, लोकगीत, राष्ट्रीय गीत तथा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम होते हैं. देशवासी देश की प्रगति का मूल्यांकन करते हैं.

गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम राजधानी दिल्ली में राजपथ में होता है. विजय चौक पर मंच बना होता है तथा दर्शक दीर्घा होती है. राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ यहाँ पधार राष्ट्रध्वज फहरा परेड का निरीक्षण करते हैं. इस दिन उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है. सेना की बैंड राष्ट्रगान की धुन गाते हैं. परेड में विभिन्न विद्‌यालयों के बच्चे, एन.सी.सी. कैडेट्स, पुलिस अर्द्धसैनिक, और सेना के जवान भाग लेते हैं. परेड को देखने नेतागण, राजदूत और आम जनता बड़ी संख्या में आती है. क्यूंकि, देश में सबसे ज्यादा आम जानता ही है. इस अवसर पर किसी राष्ट्राध्यक्ष को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है. वर्ष 2018 में सबसे ज्यादा अतिथि इस दिन आमंत्रित किये गए थे. वर्ष 2019 में साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति Cyril Ramaphosa को आमंत्रित किया गया है.

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सेना तो रोज परेड करते हैं लेकिन इसे हम आम जानता देख नहीं पाते हैं. कुछ लोग यह परेड देखने पंजाब बघा बॉर्डर जाते हैं. लेकिन, गणतंत्र दिवस के दिन यह परेड बहुत ही आकर्षक और दिल्ली के राजपथ के साथ दूरदर्शन पर भी प्रसारित किया जाता है. सेना और अर्द्धसैनिक बलों की टुकड़ियाँ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ती हैं. परेड के बाद झांकियों का दृश्य सलामी मंच के सामने से गुजरता है. एक से बढ़कर एक सजी- धजी झाकियाँ देखने को मिलता है जो देश के एकता और अखंडता को दिखाती है. किसी झांकी में झारखण्ड के आदिवासी का मनमोहक दृश्य तो किसी में कश्मीर के शिकारे का दृश्य तो किसी में महात्मा बुद्ध की शांत मुद्रा की झलक देखने को मिलती है. वैसे तो कई शहर में महाराणा प्रताप अपने घोड़े पर सवार है और उस चौराहे को कहीं घोड़ा चौक तो कहीं महाराणा प्रताप चौक कहा जाता है. ऐसा ही कुछ नज़ारा इस झांकी में भी देखने को मिलता है. किसी में महाराणा प्रताप अपने घोड़े चेतक पर नजर आते है तो किसी में रणचंडी बनी लक्ष्मीबाई, किसी-किसी झाँकी में नृत्यांगनाएँ नाचती-गाती सबको मंत्रमुग्ध किए चलती हैं. विभिन्न राज्य अपनी झाँकी में अपनी संस्कृति को दर्शाते हैं. बहादुर बच्चे हाथी या जीप पर सवार होकर बहुत प्रसन्न दिखाई देते है. गणतंत्र दिवस के समारोह में राष्ट्रपति देश के निमित्त असाधारण वीरता प्रदर्शित करनेवाले सेना और पुलिस के जवानों को वीरता पुरस्कार एवं पदक प्रदान करते है.

गणतंत्र दिवस के दिन इंडिया गेट के ऊपर नील असमान में भी तिरंगे का रंग दिखता है. यह दिन हमारी उपलब्धियों के मूल्यांकन का दिन है. गुलाम से आज़ाद हुए फिर गणतंत्र देश ने हर पांचवर्षीय योजना में कुछ मंजिल तय किया और उसमें से कुछ हासिल हो पाया तो कुछ के लिए अभी भी लगातार काम किया जा रहा है. देश की सरकार कई कार्यों के लिए ठोस कदम उठती है. जिसमें से कुछ कदम इतने ठोस होते हैं कि सरकार उसे उठा ही नहीं पाती है. कई समाचार पत्रों, न्यूज़ चैनल के अलावे आम आदमी भी इसकी समीक्षा करते हैं. लेकिन, वास्तव में जो बदलाव है वह धरातल पर दिखता है. अखबारों और पत्रिकाओं मैं इससे संबंधित अनेक रिपोर्टें छपती हैं और दूरदर्शन पर कई बार इसे दिखाया जाता है. इस दिन कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होती है तो कई दूरदर्शन चैनल पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है. कई दूरदर्शन चैनल पर कुछ कव्वालियों, मुशायरों और कवि सम्मेलनों की घूम मची रहती है. राजधानी की मरकारा इमारतों पर मनमोहक रोशनी की जाती है. राष्ट्र अपने गणतंत्र पर गर्व महसूस करता है.

गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर राष्ट्र अपने महानायकों को स्मरण करता है. हजारों-लाखों लोगों की कुर्बानियों के बाद देश को आजादी मिली फिर हमारा संविधान लिखा गया और इसे अम्ल में लाया गया. स्वतंत्रता हमें भीख में नहीं बल्कि इसके लिए कई क़ुरबानी देना पड़ा है. इसीलिए इन सभी का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है. गणतंत्र के मूलतत्व हैं जिन्हें हमेशा यद् रखना चाहिए जैसे समय, धर्मनिरपेक्षता, व्यक्ति की गरिमा, सर्वधर्म-समभाव, विश्व बंधुत्व. अपने गणतंत्र को फलता-फूलता देखने के लिए हमें इन शब्दों को नहीं बल्कि इन जज्बातों का सम्मान करना होगा.

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Republic Day Essay in Hindi (500 Words)

26 January Essay in Hindi यह लेख रानू प्रिया ने भागलपुर, बिहार से भेजा है जो कॉमर्स बैकग्राउंड से हैं.

Republic Day Essay in Hindi गणतंत्र दिवस देश का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रिय पर्वों में से एक है. इस दिन देश में एक अलग ख़ुशी की लहर दौड़ती है. देश भर में इस दिन को बड़े धूम धाम से मनाया जाता है. 26 January, 1950 में जो संविधान लागु किया गया था उसे सम्मान देने के लिए उसकी बंदगी के लिए हम हर वर्ष इस दिन यह त्यौहार बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मानते हैं. भारतीय गणतंत्र दिवस सभी भारतीयों के लिए बहुत ही खास अवसर है, यह दिन हमें अपने देश में स्थापित गणतंत्र और संविधान का महत्व समझाता है क्योंकि हमारे देश के स्वतंत्रता में संघर्ष के साथ हमारे देश के संविधान को बनाने और लिखने में भी बहुत संघर्ष किया गया है.

हमारा देश ही बहुत रोचक देश है. यहाँ अनेकता में एकता, सर्वधर्म, समान अधिकार के साथ कई सभ्यता और संस्कृति के होते हुए भी यहाँ हम सब मिल कर रहते हैं. जहाँ कई लोग रहते हैं वहाँ थोड़ा बहुत तकरार का होना भी स्वाभाविक है. यही वो देश हैं जहाँ कई तरह की जलवायु और कई तरह के फल हर मौसम में मिल जाता है. यह एक मात्र ऐसा देश है जहाँ हर समय 6 ऋतुए पाई जाती है. समुद्र के किनारे बसे शहरों में जहाँ हमेशा मौसम एक जैसा रहता है तो कहीं कड़ाके की ठण्ड पड़ती है तो कहीं भीषण गर्मी. इसी तरह भारतीय गणतंत्र दिवस का इतिहास भी काफी रोचक है. वास्तव में इसकी शुरुआत 26 जनवरी 1930 को हुई थी. जब कांग्रेस ने पहली बार पूर्ण स्वराज की मांग रखी थी. इसके बाद 26 जनवरी 1950 में ‘भारत सरकार अधिनियम’ को हटाकर भारत के संविधान को लागू किया, तब से इसी के उपलक्ष्य में हमारे देश के संविधान और गणतंत्र को सम्मान प्रदान करने के लिए हर वर्ष 26 जनवरी के दिन गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम मनाया जाता है.

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यह दिन भारतीय इतिहास में तो सुनहरे अक्षरों में तो लिखा ही गया है. इसके साथ ही इसे हमारे जीवन में भी सुनहरे अक्षरों में उतरना चाहिए. क्यूंकि यह दिन कई बलिदान और संघर्ष के बाद मिला है. यह दिन हमारे अंदर आत्मगौरव भरने का कार्य करता तथा हमें पूर्ण स्वतंत्रता की अनुभूति कराता है यही कारण है कि इस दिन को पूरे देश भर में इतने हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. गणतंत्र दिवस का यह पर्व हम सबके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्यूंकि, इस दिन हमें हमरे संविधान का महत्व समझाता है. भले ही हमारा देश 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो गया था. परन्तु, इसे पूर्ण रुप से स्वतंत्रता की प्राप्ति 26 जनवरी 1950 को मिली थी. जब हमारे देश का संविधान प्रभावी हुआ और हमारा देश विश्व पटल पर एक गणतांत्रिक देश के रुप में स्थापित हुआ. आज के समय यदि हम स्वतंत्र रुप से कोई भी फैसला ले सकते हैं या फिर किसी प्रकार के दमन तथा दुर्वव्यस्था के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं, तो ऐसा सिर्फ हमारे देश के संविधान और गणतांत्रिक स्वरुप के कारण संभव है. यहीं कारण है कि हमारे देश में गणतंत्र दिवस को एक राष्ट्रीय पर्व के रुप में मनाया जाता है.

अंत में सिर्फ मुझे इतना कहना है कि देश गणतंत्र होने के बाद हमें कई अधिकार दिया गया है. लेकिन, अधिकार के साथ कुछ कर्तव्य भी दी गई है. यदि हम कई जगहों पर अधिकार दिखाते हैं तो मुझे अपने कर्तव्य का निर्वाह जरूर करना चाहिए.

Republic Day Essay in Hindi (250 Words)

26 January Essay in Hindi यह लेख Himanshu Singh ने नई दिल्ली से भेजा है यह ये भी कॉमर्स के स्टूडेंट हैं.

अंग्रेजी कैलंडर के हिसाब से गणतंत्र दिवस (Republic Day) साल का पहला राष्ट्रिय पर्व है. इस दिन पूरे देश में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र होने की ख़ुशी मनाई जाती है. वैसे तो इस देश में कई मजहब और संस्कृति के लोग रहते हैं लेकिन, फिर भी यहाँ अनेकता में एकता देखने को मिलती है. सभी जगहों पर झंडोतोलन के बाद राष्ट्रगान गया जाता है. इसके बाद संस्थानों में अलग अलग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. 15 August 1947 में देश आजाद जरूर हो गया लेकिन अपना संविधान नहीं था. 2 वर्ष 11 महीने 18 दिन बाद जब देश का संविधान लिखा गया तो इसे 26 जनवरी 1950 से लागु किया गया और तब से ही इस दिन को भारत देश में लोकतांत्रित व्यवस्था लागु होने की ख़ुशी में मनाया जाने लगा. इस दिन को भारत सरकार द्वारा पूरे देश में राजपत्रित अवकाश के रुप में घोषित किया गया है और इसे पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है.

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देश की व्यवस्था हर साल राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली में बड़े ही धूम धाम से गणतंत्र दिवस कार्यक्रम का आयोजन करती है. इस उपलक्ष में राजपथ पर बहुत ही भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. जिसमें इंडिया गेट पर खास परेड का आयोजन होता है. यहाँ 31 तोपों से देश के राष्ट्रपति को सलामी दी जाती है. हर राज्य अपना झांकी यहाँ प्रस्तुत करता है जिसे राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया जाता है. कुछ लोग तो एक दिन पहले से ही इंडिया गेट पहुच जाते हैं तो कुछ लोग 26 January की सुबह से यहाँ जाना शुरू कर देते है.

इंडिया का नज़ारा कुछ ऐसा होता है मनो जैसे रेगिस्तान में रेत यह पूरा मैदान देशवाशियों से भरा होता है. इसमें तीनों सेनाएँ विजय चौक से अपनी परेड शुरु करती है जिसमें तरह-तरह के अस्त्र-शस्त्रों का भी प्रदर्शन किया जाता है. आर्मी बैंड, एन.सी.सी कैडेट्स और पुलिस बल भी विभिन्न धुनों के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन करते है. राज्यों में भी इस उत्सव को राज्यपाल की मौजूदगी में बेहद शानदार तरीके से मनाया जाता है. इतने बड़े देश जहाँ कई समाज, परिवेश, धर्म के लोग रहने के बावजूद “विविधता में एकता” के अस्तित्व को दिखाने के लिये भी यह पर्व मनाया जाता है.

Republic Day Speech गणतंत्र दिवस पर हिंदी में भाषण

Conclusion Republic Day Essay in Hindi

कई बच्चों के द्वारा हमें यह लेख भेजा गया जिसे हमने अपने ब्लॉग पर पब्लिश किया है. हो सकता है इसमें से कुछ बच्चों ने 26 January Essay in Hindi लेख  इन्टरनेट का सहारा लिया होगा. क्यूंकि अब तो किताब की जगह इन्टरनेट की सहारा लिया जाता है. ऐसे में उन्होंने कुछ वेबसाइट से प्रेरणा लेकर ही इतना अच्छा लेख लिख पाए हैं.

इसीलिए उन सभी वेबसाइट एडमिन से हमारा निवेदन है यदि कोई बच्चा आपके वेबसाइट से पढ़ कर या वेबसाइट पर लिखे गए कुछ शब्द या किसी लाइन या किसी पैराग्राफ का कंटेंट यहाँ लिखा हो तो उन्हें अबोध बालक समझ उन्हें माफ़ कर देंगें. मैं उन सभी वेबमास्टर्स का धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने ऐसे कंटेंट इन्टरनेट पर उपलब्ध करवाए जिससे बच्चे उसे पढ़कर इतना अच्छा कंटेंट लिख पाए. गुरूजी टिप्स की ओर से आप सभी छात्र, छात्राओं को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.

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2 Comments

  1. Thank you sir, very good info you gave Republic Day is not just a flag day for us. This is the result of the sacrifice of our millions of crores fighters. We must salute all those heroes on this day. All Indians from my side Happy Republic Day 2019.

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