समय क्या है, समय किसे कहते हैं, What is Time in Hindi

समय क्या है? What is Time in Hindi समय के बारें में जितना कहा जाये उतना कम है. लेकिन कुछ शब्दों में आपको समय के बारें में समझाने का प्रयास कर रही हूँ, उम्मीद है मेरी बात सही से समझ आएगी यदि इसके बाद आपका कोई प्रश्न हो तो कमेंट में जरूर पूछ सकते हैं.

samay kya hai

What is Time in Hindi समय क्या है?

समय क्या है,या समय किसे कहते है,इसका व्याख्या करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. लेकिन, अगर इसे  सरल शब्दों में कहा जाए तो समय का दूसरा नाम ही जीवन है. समय एक ऐसी सम्पति है, जो हम सभी को जिंदगी के साथ मिली हुई प्राकृतिक वरदान है. इस धरती पर बांकी सभी सम्पति हम अपने मेहनतज्ञान और कर्मों के द्वारा अर्जित कर सकते है. लेकिन, हमें मेहनत, ज्ञान और कर्म को निरंतर करने के लिए भी समय चाहिए. समय एक ऐसी सम्पति है, जिसका हम अर्जन कभी कर ही नहीं सकते. अगर समय का कुछ कर सकते है तो वो है समय का संयोजन इसे Time Management कहते हैं. हम सभी के पास सिर्फ 24 घंटे होते है, लेकिन जिसने 24 घंटे का सही संयोजन कर लिया उसने जिंदगी में बहुत कुछ हांसिल कर लिया. Time Management ही Success है. “जब समय बीतता है तो घटनाये घटित होती है, और जब घटना लगातार घटती चली जाती है, तो उसके बिच होने वाले अंतराल को समय कहते है.” समय मापने के मापन को घड़ी या घटीयंत्र भी कहते है.

समय का सदुपयोग कैसे करें ? Importance Of Time

वैसे तो समय की परिभाषा कई लोगों ने अपने अनुसार अलग अलग दिया है. सभी को एक साथ मैं यहाँ रख रही हूँ. हो सकता है आपके अनुसार समय कुछ और हो. क्यूंकि जिसके पास काम ही काम है उसके लिए 24 घंटे कम पर जाते हैं लेकिन जिसके पास काम नहीं है उसे यह 24 घंटा भी पहाड़ तोड़ने जैसा लगता है.

  • लेखक पाल डेविस के अनुसार समय आइंस्टाइन की अधूरी क्रांति है.
  • अरस्तु के अनुसार समय गति का प्रभाव हो सकता है, लेकिन अरस्तु ने ये भी कहा है की गति की चाल कभी तेज अथवा काम हो सकती है, लेकिन समय की नहीं.
  • समय एक आकस्मिक अवधारणा भी है. गति तथा बलों के प्रक्रिया के स्वरुप समय की उत्पति होती है, लेकिन जिसे हम समय मानते है, वो तो एक भरम मात्र है. हमारी मस्तिष्क हमें भूतकाल का भ्रम करवाती है, और हमारी चेतना हमारी आसपास हो रही घटना के रूप में हमें वर्तमान का एहसास करवाती है और भविष्य हमारी भूतकाल के यादाश्त के आधार पर कल्पना मात्र है.
  • जान एलिस मैकटेगोर्ट के अनुसार भूत और भविष्य तो एक कल्पना मात्र है, सत्य केवल वर्तमान ही है, उन्होंने ये भी महसूस किया की समय तो वास्तविक है ही नहीं.
  • जीवन का महल घंटा, मिनट और सेकंड के ईंट से बनाया गया है.

समय का महत्व और सदुपयोग

समय एक ऐसी सम्पदा है जिसका महत्व हम जान लें और उसका सही सदुपयोग करे तो फर्श से अर्श तक बहुत आसानी से पहुंच सकते हैं. कुछ लोगों को लगता है मैं समय को नष्ट कर रहा हूँ. लेकिन ऐसा नहीं है समय को तो हम कभी नष्ट कर ही नहीं सकते, क्यूंकि समय गतिशील है, वह कभी किसी का इंतजार नहीं करती, समय सेकेण्ड-मिनट-घंटा-दिन-महीना और वर्षो के अंतराल में चलता चला जाता है और समय रेत की तरह हमारी मुठी से निकलता चला जाता है. इस तरह समय को हम नहीं, बल्कि समय हमें नष्ट कर रहा होता है.

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मरते समय एक विचारशील व्यक्ति ने अपने जीवन के व्यर्थ ही चले जाने पर दुःख प्रकट करते हुए कहा था “मैंने समय के मूल्य को समझा नहीं , और उसे नष्ट किया और अब समय मुझे नष्ट कर रहा है. इसीलिए यदि हमें भी अपने जीवन से प्रेम है, तो उचित यही है की समय को व्यर्थ नष्ट न करें.

खोई दौलत मेहनत और कर्म कर फिर से कमाया जा सकता है, भूली हुई विद्या लगन और ध्यान से फिर से प्राप्त कर अर्जित कर सकते हैं, खोया हुआ स्वास्थय सही चिकित्सा से वापस पा सकते हैं. लेकिन, क्या कोई ऐसी सम्पति या यंत्र (Technology) है, जिससे खोया हुआ समय वापस प्राप्त किया जा सके.

जी नहीं खोया हुआ समय किसी भी प्रकार से नहीं लौटाया जा सकता इस प्रकार हमारे पास यदि कुछ शेष बचता है तो सिर्फ और सिर्फ पश्चाताप और न जाने हम पश्चाताप करके कितने समय और गवां देते हैं.

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धनवान व्यक्ति धन खर्च कर कुछ अभीष्ठित वस्तुए खरीद सकता है. लेकिन, धन पाने के लिए बदले में कुछ देना होता है, और वह है समय. यदि एक-एक क्षण को कीमती मोती की तरह खर्च किया जाये तो हम समय के बदले धन-लक्ष्मी, विद्या, बुद्धि, कीर्ति-आरोग्य, सुख-सन्ति, मुक्ति आदि जो भी वस्तु रुचिकर हो खरीद सकते है. क्यूंकि धन, विद्याबुद्धि आदि ये सब बाजार में न ही मिलते है और न ही हम खरीद सकते हैं. ये सभी चीजें सिर्फ समय से ही संभव है. इसीलिए हमें चाहिए की हम समय का सही सदुपयोग करें.

जो लोग आलस्य और प्रमाद में पड़े हुए जीवन के बहुमूल्य क्षणों को यूं ही बर्बाद करते रहते है उनकी एक-एक दिन करके सारी आयु व्यतीत हो जाती है और जीवन के अंतिम मोर पर समझ आता है,कि उन्होंने कुछ भी नहीं प्राप्त किया. समय का दूसरा नाम जीवन है. समय के एक-एक क्षण को पैसो के तरह सोच-समझकर खर्च करना चाहिए और बदले में बहुत कुछ प्राप्त कर सकते है.

प्रतिदिन एक घंटा समय यदि किसी विषय को सीखने में लगाया जाये तो आने वाले कुछ समय में उस विषय के विशेषज्ञ बन सकते है हैं. समय के महत्व को समझने वाले और उसका सही सदुपयोग करने वाले महान लोगों के अनेक उदाहरण भी है.

समय को समझने वाले महान लोग

  1. संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के गणितज्ञ “आचार्य चार्ल्स फ़ास्ट” प्रतिदिन एक घंटा गणित सिखने का नियम बनाया और उस नियम पर अंत तक डेट रहकर ही उसमे प्रवीणता प्राप्त की.
  2. ईश्वरचंद्र विद्यासागर समय के इतने पाबन्द थे कि जब वे कॉलेज के लिए जाते थे तो उन्हें देखकर लोग अपनी घड़ियाँ ठीक करते थे. क्यूंकि, वे जानते थे विद्यासागर कभी एक मिनट भी आगे पीछे नहीं चलते है.
  3. मोजार्ट ने तो रैक्यूम नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ मृत्यु शैया पर पड़े रहकर और मौत से लड़कर पूरा किया था.
  4. गैलीलियो दवा-दारू बेचने का काम धंधा करते थे, तो भी उन्होंने थोड़ा-थोड़ा समय बचाकर विज्ञान के महत्वपूर्ण अविष्कार किया.
  5. घर-गृहस्ती के अनेक कार्यों में उलझने वाली और अपने परिवार को सँभालने वाली महिला “हैरियट विचार स्टो” ने गुलाम प्रथा के विरूद्ध आग उगलने वाली पुस्तक “टॉम काका की कुटिया” लिखी. जिसकी प्रशंसा आज भी बेजोड़ रचना के रूप में की जाती है.
  6. लांगफेले ने चाय बनाने के लिए पानी उबलने में जितना समय है, उसका उपयोग कर “इन्फरल” नामक ग्रन्थ को पूरा किया.

इस प्रकार अनगिनत उदहारण है जो समय के महत्व को समझाता है. उन्नतिशील और बुद्धिमान व्यक्ति में एक ही समानता देखने को मिल सकती है वो समय की पाबन्दी है. मतलब Time Management. जिसने भी इस तथ्य को समझा उसने यहाँ आकर अपने जीवन में बहुत कुछ प्राप्त किया.

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समय भाग रहा है

समय अपनी गति से चल नहीं रहा बल्कि भाग रहा है. “परमात्मा एक समय में एक ही क्षण देता है और दूसरा क्षण देने से पहले उस पहले वाले क्षण को छीन लेता है. इसीलिए यदि वर्तमान काल में उपलब्ध क्षणों का हम सदुपयोग नहीं करें तो वे एक-एक करके खर्च होता चला जाता है और अंत में पछताने के अलावे कुछ नहीं बचता है. निरंतर गतिमान इस समय के साथ कदम मिलकर चलने पर ही मानव जीवन की सार्थकता है. समय के साथ कदम से कदम मिलकर नहीं चलने वाला व्यक्ति पिछड़ जाता है. पिछड़ना सफलता से दूर हटना है, इसीलिए सफलता चाहिए तो समय के साथ कदम से कदम मिलकर चलना होगा.

मनुष्य जीवन में पिछड़े जिंदगी का कोई महत्व नहीं है. साँस लेकर जीने को तो हम सभी जीते है, लेकिन जो उस गिनी हुई साँस और समय के साथ कदम से कदम मिलकर चलता है समय का सही सदुपयोग करता है वो ही अपने जिंदगी के 60 वर्षो में इतना कुछ प्राप्त कर लेता है कि एक आम आदमी को उनका इतिहास पढ़ने के लिए भी समय कम पर जाता है और वो मरकर भी अमर हो जाते है. फिर बाद में उनका नाम इतिहास के पन्नो पर सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता है. इसीलिए हम सभी को चाहिए की हम समय के महत्व को समझे और उसका सही सदुपयोग करें.

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उम्मीद करती हूँ यह Samay Kya Hai इस पर लिखा गया यह आर्टिकल आपको जरूर पसंद आया होगा. यदि इसमें कुछ कमीं रह गई हो तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं. वैसे समय को जितनी जल्दी समझ लोगे उतनी ही अच्छी बात है. क्यूंकि बीता हुआ समय  कर नहीं आता है. इसीलिए समय के महत्व को समझना जरूरी नहीं बल्कि, बहुत जरूरी है. इस दुनिया में सबसे बलवान समय ही है जिसके सामने सभी को झुकना पड़ता है. समय ही है जिसने पप्पू को भी पास करवा दिया.

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5 Comments

  1. साहब समय के बारें में तो मैं बहुत पढ़ा हूँ. लेकिन आपके लिखने का तरीका दीवाना कर देता है. धन्यवाद गुरूजी

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