इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है और कैसे काम करता है?

EVM Kya Hai देश में चुनाव का माहौल है. सत्ता की कुर्सी के लिए हर एक पार्टी एक दूसरे पर कीचड़ उछालने में लगी हुई है. आचार संहिता की वजह से कुछ हद प्रचार का तरीका सही है. चुनाव प्रचार के लिए कई हथकंडा अपनाया जाता है. इसके बाद चुनाव आयोग शांतिपूर्ण चुनाव करवाने के बाद चुनाव परिणाम घोषित करता है. यहाँ से शुरू होता है EVM की कहानी इससे पहले तक कोई भी पार्टी EVM की बात नहीं करता है. लेकिन, चुनाव परिणाम आते ही EVM ट्रेंडिंग में आ जाता है. आखिर क्या है ये EVM और चुनाव परिणाम के बाद ही EVM ट्रेंडिंग में क्यों आता है? EVM KYA HAI इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का इस्तेमाल भारत में आम चुनाव तथा राज्य विधानसभाओं के चुनाव में आंशिक रूप से 1999 में शुरू हुआ तथा 2004 से इसका पूर्ण इस्तेमाल हो रहा है. ईवीएम के इस्तेमाल से जाली मतदान तथा बूथ कब्जा करने की घटनाओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है. मत-पेटिकाओं  की तुलना में ईवीएम को पहुंचाने तथा वापस लाने में आसानी होती है.

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ईवीएम क्या है What is EVM in Hindi

लोकतान्त्रिक देश में जनता द्वारा सरकार का चुनाव किया जाता है. चुनाव की मदद से लोकसभा और विधानसभा में जनता अपने वोट से सरकार का चुनाव करती है. आजादी के बाद पाहता चुनाव 25 अक्टूबर से 1951 से 27 मार्च 1952 के बीच चुनाव करवाया गया था. इस समय देश की आबादी कम होने के बावजूद चुनाव करवाने में पांच महीने का समय लग गया था. इस समय बैलेट पेपर की मदद से चुनाव करवाया गया था. इस प्रक्रिया में कई खामियां थी, कई तरह का भ्रष्टाचार इस प्रक्रिया में लिप्त था. लोकतंत्र को खतरा से बाहर लेन के लिए इसमें कई बदलाव लाया गया जिसके परिणामस्वरूप ईवीएम लाया गया. EVM Full Form – Electronic Voting Machine, इस मशीन से चुनाव प्रक्रिया को कई भ्रष्टाचार से मुक्त किया गया.

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ईवीएम का इतिहास

इलेक्ट्रॉनिक कोपरशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड ने ईवीएम बनाया है. यह इलेक्ट्रानिकली वोट की गिनती करता है जिससे चुनाव समाप्त होने पर वोट की गति जल्दी की जा सके. पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल मई, 1982 में केरल के परूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के 50 मतदान केन्द्रों पर हुआ. इसके बाद कुछ अड़चन आयी जिसका समाधान होता रहा है कुछ दिनों तक ईवीएम का मामला उच्चतम न्यायलय में भी रहा है. वर्ष 2004 के आम चुनाव में देश के सभी मतदान केन्द्रों पर 10.75 लाख ईवीएम के इस्तेमाल के साथ इसका इस्तेमाल शुरू हो गया और लोकतंत्र, ई-लोकतंत्र में परिवर्तित हो गया. तब से सभी चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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ईवीएम डिजाईन और टेक्नोलॉजी

भारतीय चुनाव में प्रोयोग किया जाने वाला EVM दो हिस्से में बता है. यह ‘टू पीस सिस्टम’ के अधीन काम करता है. इसका एक हिस्सा बैलेट यूनिट कहलाता है, जिसमें उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिन्ह दर्शाया जाता है. यह एक तार से दूसरी ईकाई इलेक्ट्रॉनिक बैलेट बॉक्स से जुड़ा होता है. वोट डालने के लिए बैलेट पेपर की जगह ईवीएम की बैलेट यूनिट में विभिन्न पार्टियों के चुनाव चिन्ह के सामने दिए गये नीले रंग के बटन को दबा कर वोट देना होता है. इस मशीन को एक कंट्रोलर से चलाया जाता है जिसमें प्रोग्रामिंग की जाती है और इस प्रोग्रामिंग की सिक्योरिटी बहुत अच्छी होती है. यह मशीन छः वोल्ट की एल्कलाइन बैटरी से चलती है.बैटरी होने की वजह से इसे इस्तेमाल करना और भी आसान हो जाती है. आज भी देश के सभी गांवों तक बिजली नहीं पहुँच पायी है. किसी उमीदवार को वोट देने के बाद मशीन लॉक हो जाता है, एक बटन को कई बार दबाने से भी एक ही वोट दिया जा सकता है. इस तरह ईवीएम चुनाव में “एक आदमी एक वोट” का नियम बनाये रखता है जिससे चुनाव में भ्रष्टाचार कम होता है. एक EVM Machine में अधिकतम चौसंठ उम्मीदवारों के लिए वोटिंग कराई जा सकती है.

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ईवीएम कैसे इस्तेमाल किया जाता है?

इसका इस्तेमाल का प्रक्रिया बहुत ही रोचक है. वैसे तो आपमें से कई लोगों ने EVM Machine पर अपना वोट जरूर दिया होगा। आज उस प्रक्रिया को अच्छे से समझिये। जनता ईवीएम बटन दबाकर पने चाहते को उम्मीदवार को वोट देता है. वोट डालते ही पुल्लिंग ऑफिसर मशीन मे दिया गया ‘क्लोज’ बटन दबा देता है. ऐसा करने से EVM सिर्फ एक वोट ही लेता है. एक नियत समय पर वोट देने की प्रक्रिया बंद कर दिया जाता है और इसके बाद प्रिसाईडिंग ऑफिसर प्रत्येक पोलिंग एजेंट्स को कुल रिकॉर्ड हुए वोटों का एक ब्यौरा देते हैं. वोट गणना के समय में गिने जा रहे वोटों को चुनाव के दिन दिए गए ब्योरे से मिलाया जाता है और इसमें यदि कोई गलती पायी जाती है तो काउंटिंग एजेंट्स उसका ख़ुलासा करता है. मत गणना के समय मशीन में दिया गया ‘रिजल्ट बटन’ दबाकर रिजल्ट की घोषणा करता है. रिजल्ट बटन मतगणना से पहले नहीं दबाया जाये इसके लिए इसे सील कर रखा जाता है. यह सील मतगणना के दिन ही खोला जाता है.

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मतदाता सत्यापन

मतदाता सत्यापन है जनता ने जिस किसी भी उम्मीदवार को वोट दिया है वोट देते ही एक पर्ची निकले जिसमें निर्वाचित उमीदवार का चुनाव चिन्ह मौजूद हो. वर्ष 2008 के अक्टूबर में निर्वाचन आयोग ने आईआईटी मुंबई के पूर्व निर्देशक पी वी इन्दिरसन की अध्यक्षता में ईवीएम में VVPAT व्यवस्था लाने के लिए एक तकनीकी टीम का गठन किया. जिसके तहत मतदाता सत्यापन का काम किया जाये. 26 जुलाई 2011 में इस व्यवस्था के तहत जम्मू कश्मीर के लद्दाख, केरला के थिरुवानान्थापुरम, मेघालय के चेरापूंजी, पूर्वी दिल्ली और राजस्थान के जैसलमेर में इस सिस्टम के द्वारा चुनाव करवाया गया. भारत निर्वाचन आयोग ने 19 जनवरी 2012 को इलेक्ट्रॉनिक कारपोरेशन और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड को ये आदेश दिए, कि नए ईवीएम में परचा प्रिंट की सुविधा होनी चाहिए. VVPAT व्यवस्था 543 में से आठ सीटों पर प्रारंभिक प्रोजेक्ट के तौर पर इस्तेमाल करके देखा गया. इनमे लखनऊ, गांधीनगर, साउथ बंगलोर, सेंट्रल चेन्नई, जादवपुर, पटना साहिब और मिजोरम सीटें थीं.

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ईवीएम सुरक्षा

सभी चुनाव परिणाम के बाद EVM पर अंगुली उठाया जाता है. पिछले लोक सभा चुनाव 2014 में जब Congrees हार गई तो EVM को जिम्मेदार ठहरा दिया। इसी तरह जब कोई चुनाव परिणाम से संतुष्ट नहीं होता तो EVM पर सवाल करना शुरू कर देता था. इस मुद्दे को संज्ञान में लिया गया और अप्रैल 2010 में हरी प्रसाद के नेतृत्व में एक स्वाधीन जांच आयोग, जिसमे रोप गोंग्ग्रिजिप और जे अलेक्स हलदेर्मन भी थे. इसमें एक रिपोर्ट तैयार किया गया जिसमें ईवीएम पर शोधकर्ताओं द्वारा दो तकनीकी हमले दिखाए गये. ऐसी घटनाओं से निजात पाने के लिए शोधकर्ताओं ने वोटिंग सिस्टम को और भी अधिक पारदर्शी बनाने के लिए पेपर बैलेट, काउंट ऑप्टिकल स्कैन और वोटर वेरीफाईड पेपर ऑडिट ट्रेल का सुझाव दिया. निर्वाचन आयोग ने बताया ईवीएम में ऐसी हरक़त करने के लिए ईवीएम को खोलकर बहुत ऊंची तकनीकी बुद्धि का इस्तेमाल करना होगा. चुनाव बाद ईवीएम बहुत कड़ी निगरानी में रखा जाता है. मतगणना से पहले किसी को भी इसे हाथ लगाने की अनुमति नहीं दी जाती है. इसके अलावे चुनाव के परिणाम में फेर बदल के लिए अधिक से अधिक मशीनों की आवश्यकता होगी. 25 जुलाई 2011 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक पिटीशन के तहत निर्वाचन आयोग को ईवीएम को और बेहतर बना कर तीन महीने के अन्दर रिपोर्ट पेश करने को कहा.

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ईवीएम से होने वाली परेशानी

हर चीज़ अच्छाई और बुराई से भरा हुआ है. यदि EVM से चुनाव करवाना इतना आसान हो गया है तो इसमें कुछ खामियां भी जरूर होगा। इसका सबसे बारे दिक्क़त एक उमीदवार को किस बूथ से कितना वोट मिला है इसकी जानकारी निकल सकता है. इस वजह से जिस क्षेत्र से वोट नहीं मिला या कम मिला, उमीदवार उस क्षेत्र के उन लोगों के साथ पक्ष पात कर सकता है.

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ईवीएम की विशेषताएँ

  • यह छेड़छाड़ मुक्त और संचालन में सरल है.
  • एक मशीन को कई विभिन्न चुनाव में लाया जा सकता है.
  • इसके इस्तेमाल से बैलेट पेपर पर होने वाला खर्च काम हो गया.
  • पोर्टेबल होने की वजह से इसे एक जगह से दूसरे जगह आसानी से ले जाया जा सकता है.
  • इसमें मतगणना करना बहुत आसान हो गया.
  • इससे फॉल्स वोटिंग और बूथ कब्ज़ा को काबू किया गया.
  • एक EVM औसत पंद्रह वर्षों तक उपयोग में लाया जा सकता है.
  • ईवीएम मशीन का इस्तेमाल बिना बिजली के भी किया जा सकता है क्योंकि मशीन बैट्री से चलती है.
  • एक ईवीएम मशीन अधिकतम 3840 वोट दर्ज कर सकती है.

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EVM KYA HAI इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है और कैसे काम करता है? उम्मीद करता हूँ इस प्रश्न का जवाब इस पोस्ट में मिल गया है. इस जानकारी से सम्बंधित कोई प्रश्न है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछिए। इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ व्हाट्सप्प और फेसबुक पर जरूर शेयर कीजिये।

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2 Comments

  1. आप ने इस ब्लॉग के जरिए बहुत अच्छी जानकारी दी है…

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