EVM इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से जुड़ा कुछ सवाल जवाब

EVM इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से जुड़ा कुछ सवाल जवाब  चुनाव परिणाम आते ही EVM के बारें में कई अटकले सुनने को मिलता है. EVM से संबंधित कुछ सवाल जवाब इस पोस्ट में शामिल किया गया है. उम्मीद करता हूँ, आपके सभी सवालों जवाब मिल जायेगा। यदि इसके अलावे  आपका कोई प्रश्न है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछिए।

evm kya hai

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है?

EVM का फुल फॉर्म Electronic Voting Machine है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन एक केबल से कंट्रोल यूनिट से जुड़ा होता है. कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास होती है.

ईवीएम किसने बनाया है?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलूर एवं इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया, हैदराबाद के सहयोग से निर्वाचन आयोग द्वारा तैयार किया गया है.

मशीन की लागत क्या  है?

शुरुआती समय में इसकी लागत 5500/- थी.

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन क्या है और कैसे काम करता है?

ईवीएम का पहली बार चलन कब शुरू किया गया?

वर्ष 1989 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोग 16 विधान सभाओं के साधारण निर्वाचनों में इस्तेमाल किया गया. इन 16 विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्रों में से मध्य प्रदेश में 5, राजस्थान में 5, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में 6 विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र थे.

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों कैसे काम करता है?

ईवीएम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड एवं इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड द्वारा विनिर्मित 6 वोल्ट की एल्कलाइन साधारण बैटरी पर चलती है. ईवीएम इस्तेमाल के लिए बिजली की जरूरत नहीं है.

अधिकतम कितने मतों को ईवीएम में डाला जा सकता है?

एक ईवीएम में अधिकतम 3840 मत दर्ज किए जा सकता है. ईवीएम की क्षमता पर्याप्त मत से अधिक है.

अधिकतम कितने अभ्यार्थियों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें काम कर सकती हैं?

ईवीएम अधिकतम 64 चुनाव अभ्यार्थियों के लिए काम कर सकती है. एक बैलेटिंग यूनिट में 16 अभ्यार्थियों के लिए प्रावधान है. यदि अभ्यार्थियों की कुल संख्या16 से अधिक हो जाती है तो पहली बैलेटिंग यूनिट के साथ-साथ एक दूसरी बैलटिंग यूनिट जोड़ी जा सकती है.

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क्या इससे निरक्षर मतदाताओं के लिए समस्या नहीं उत्पन्न होगी?

ईवीएम द्वारा मतदान, बैलेट पेपर से मतदान करने की तुलना में ज्यादा सरल है. यहाँ अपनी पसंद के अभ्यार्थी के प्रतीक के सामने वाला बटन दबाना होता है. बैलेट में वोट देने में ज्यादा समय लगता था. ईवीएम में मतदाता को केवल अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने वाला बटन दबाना होता है.

इसकी कार्यप्रणाली मतदान करने की पारम्परिक प्रणाली से किस प्रकार भिन्न है?

इस मशीन से चुनाव करवाना ज्यादा आसान है. इसमें एक बटन दबाते ही वोट प्रक्रिया पूरा हो जाता है. बैलेट पेपर से वोटिंग करवाने में  समस्याएँ होती थी साथ ही इसमें भ्रष्टाचार बहुत होता था. इसमें बूथ कब्ज़ा भी किया जाता था. EVM की मदद  भ्रष्टाचार मुक्त चुनाव संभव हो पाया है.

यह कैसे जाने मत दर्ज हो गया है?

मतदाता के बटन दबाते ही बायीं ओर लगे एक छोटे-से लैम्प में लाल बत्ती जल उठती है और साथ ही साथ, एक लम्बी बीप ध्वनि सुनाई देती है. इस प्रकार, मतदाता को आश्वस्त करने के लिए ऑडियो और वीडियो दोनों में संकेत मैजूद होते है कि उसका मत दर्ज हो गया है.

यदि किसी निर्वाचन-क्षेत्र में निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यार्थियों की  संख्या 64 से अधिक हो जाए तो क्यां होगा?

यदि किसी निर्वाचन-क्षेत्र में लड़ने वाले अभ्यार्थियों की संख्या 64 से अधिक हो जाए तो ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में मत पेटी एवं मत पत्र के माध्यम  से किए जाने वाले मतदान की पारम्पररिक प्रणाली को अपनाना होगा.

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यदि किसी मतदान केन्द्र में ईवीएम खराब हो जाए तो क्या होगा?

मतदान अधिकारी के पास अतिरिक्त ईवीएम दिया जाता है ऐसे में यदि कोई EVM काम नहीं करता है तो खराब ईवीएम को नई ईवीएम से बदला जा सकता है.

क्या ईवीएम से बूथ कब्ज़ा किया जा सकता है?

मत पति को ले जाना और उसे छतिग्रस्त किया जाना बूथ कब्ज़ा है. यहाँ भी EVM ले जाया जा सकता है. लेकिन, इसमें वोट का फेर बदल नहीं किया जा सकता है.

क्या संसदीय एवं विधान सभाओं के एककालिक निर्वाचनों के लिए ईवीएम का प्रयोग किया जाए?

हां, संसदीय और विधान सभाओं के एककालिक निर्वाचनों के लिए ईवीएम का उपयोग करना संभव है और मौजूदा ईवीएम इसी सुविधा को ध्यान में रख कर बनाया गया है.

ईवीएम के उपयोग का क्या फायदा है?

इसके उपयोग से मत पत्रों की छपाई बंद हो गई. मतगणना के दिन आसानी से वोट गिना जाना संभव हुआ. इसके अलावे EVM से भ्रष्टाचार बहुत हद तक कम हुआ है.

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क्या ईवीएम का उपयोग मतदान की गति धीमी कर देता है?

नहीं, ईवीएम उपयोग से मतदान की गति और तेज हो जाती है. जबकि बैलेट पेपर से वोट देने के लिए पहले मतपत्र खोलना होता था फिर अपनी पसंद का मुहर लगाना होता था और उसे मोड़ कर मत पेटी में गिराया जाता था. ईवीएम की मदद से सिर्फ पसंद के उम्मीदवार के सामने वाला बटन दबाना होता था.

क्या बटन बार-बार दबाकर एक से अधिक बार मतदान करना सम्भव है?

बटन चाहे जितनी बार दबाओ एक ही वोट जायेगा. जैसे ही बैलेट यूनिट का बटन दबाया जाता है, मत दर्ज हो जाता है और मशीन लॉक हो जाता है. इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन ”एक व्यक्ति, एक मत” का सिद्धांत सुनिश्चित करती है.

कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में परिणाम कितने समय तक रहता है?

कंट्रोल यूनिट की मेमोरी में परिणाम जब तक चाहो रख सकते हो. जब कभी मतदान या मतगणना से संबंधित कोई याचिका दायर की जाती है तो न्यायालय उपयुक्त  मामलों में मतों की पुनर्गणना का आदेश दे सकता है.

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क्या ईवीएम में मतदान लम्बे समय के लिए स्‍टोर किया जा सकता है?

जी बिलकुल EVM में इसे लम्बे समय के लिए मतदान सुरक्षित किया जा सकता है. बैटरी की आवश्यकता सिर्फ मतदान और मतगणना के समय होता है. इसीलिए बैटरी लीक होने का या ईवीएम को नुकसान पहुंचने का कोई प्रश्न ही नहीं होता. बैटरी निकाल दिए जाने के बाद भी माइक्रोचिप में मेमोरी ज्यों की त्यों बनी रहती है. यदि न्यायालय पुनर्गणना करने का आदेश देता है तो कंट्रोल यूनिट में बैटरी लगाकर उसे पुन: सक्रिय किया जा सकता है और वह मेमोरी में संग्रहीत परिणाम प्रदर्शित करेगी.

क्या बटन दबाते समय मतदाता को बिजली का झटका लग सकता है?

यह मशीन 6-वोल्ट की बैटरी पर कारम करती है और मतदान के समय किसी भी तरह का बिजली का झटका लगने की बिल्कुल भी संभावना नहीं है.

क्या मतदान केन्द्रों तक इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को पहुंचाना मुश्किल है?

मत पेटियों की तुलना में इसे कहीं भी ले जाना बहुत आसान है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें हल्की और पोर्टेबल होती है.

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जहाँ बिजली का कनेक्शन नहीं है वहां मतदान कैसे होगा?

EVM 6 वोल्ट की बैटरी पर काम करती है. इसीलिए इसका इस्तेमाल करना बहुत आसान है. इसे काम में लगाने के लिए बिजली की कोई जरूरत नहीं है.

क्या इसे AC (Air Condition) की जरूरत होती है?

जी नहीं इसके इस्तेमाल के लिए वातानुकूलित कमरे की जरूरत नहीं होती है. इसे कहीं भी लगाकर इस्तेमाल किया जा सकता है.

अब तक कितना वोट डाला गया है यह जान सकते हैं क्या?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में परिणाम वाला हिस्सा सील कर दिया जाता है और केवल मतगणना के समय ही खोला जाता है. इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर ‘परिणाम’ बटन के अलावा एक ‘टोटल’ बटन का विकल्प मौजूद होता है. इस बटन को दबाने पर अब तक डाले गए मतों की कुल संख्या जाना जा सकता है.

यदि किसी बैलेटिंग यूनिट में 6 उम्मीदवार ही है तो क्या होगा?

सिर्फ 6 उम्मीदवार का नाम ही इस बैलेटिंग यूनिट में लिखा होता है. नीचे का हिस्साछिपा दिया जाता है और इसके सामने लगे बटन को भी निष्क्रिय कर दिया जाता है. यह बटन दबाने से न ही लाइट जलती है न ही बीप की आवाज सुनाई देती है.

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VVPAT (Voter Verified Paper Audit Trail) क्या है?

EVM से संबंधित कई सवाल उठाया गया जिसके लिए इलेक्शन कमीशन ने एक कमीटी का गठन किया. इस कमेटी का मुख्य काम एक EVM को Paper Trail Machine के साथ जोड़ना था. इसमें वोट डालने के बाद एक पेपर प्रिंट होता है जिसमें मतदाता ने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है उसका नाम और चुनाव चिन्ह का प्रिंट मिलेगा. इस तरह VVPAT के इस्तेमाल से मतदान का वेरिफिकेशन संभव हो पाया.

Conclusion EVM Machine

EVM एक वोटिंग मशीन है जिससे चुनाव की प्रक्रिया भ्रष्टाचार से मुक्त किया गया और मतदान की प्रक्रिया को तेज किया गया. यह पारम्परिक मतदान प्रक्रिया से बिलकुल अलग और सरल है. इस मशीन के उपयोग से बहुत कम समय में चुनाव करवाना और मतगणना संभव हो पाया है.

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