होम लोन लेने के पहले इन बातों को जरूर जान लें

लगभग सभी बैंक लोन देने का काम करती है. कुछ तो ऐसे भी बैंक है जो सिर्फ लोन ही देती है. कुछ Financial Institution है जो License लेकर लोन का काम कर रही है ओर छोटा लोन देती है. जैसे शुरुआत में IndusInd Bank सिर्फ Two Wheeler Loan देने का काम करती थी. ऐसा ही घर बनाने में होता है. जब 50,000 (पचास हज़ार) की Bike के लिए लोन मिल रहा है तो घर बनाने या घर खरीदने के लिए तो लोन लेना ही होगा. अपनी जमीन होने पर 10 लाख में घर बन सकता है शायद इतना पैसा आपके पास हो सकता है. लेकिन किसी मेट्रो सिटी में फ्लैट खरीदना हो तो बैंक लोन के बिना नहीं हो सकता. शायद कोई खरीद भी ले लेकिन फिर Income Tax को कौन जवाब देगा.

घर – मकान में कोई भी काम करवाने के लिए लोन लेना ही होता है. हो सकता है सभी को नहीं लेना हो लेकिन मैं एक मिडिल क्लास फॅमिली की बात कर रहा हूँ. कई बार मकान रिपेयर या उसके ऊपर ओर फ्लौर बनाने के लिए भी लोन लेना होता है. यहाँ लोन से सम्बंधित लगभग सभी जानकारी दी गई है. इस पोस्ट में कुछ प्रश्नों का जवाब दिया गया है जो अक्सर एक लोन लेने वाला जानना चाहता है. लोन का मतलब कर्ज है कर्ज लेने से पहले उसे चुकाने के बारें में सोचना चाहिए. बैंक भी लोन देने से पहले कैसे उसे वापिस करोगे उसके बारें में जानना चाहती हैं. लोन कितना मिल सकता है यह आपके Monthly Income पर निर्भर करता है.

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आपको कितना लोन मिलेगा यह उसे चुकाने की क्षमता पर निर्भर करती है. यह मासिक कमाई, खर्च, संपत्ति, देनदारी, कमाई के स्रोत पर निर्भर करती है. बैंक सबसे पहले यह देखती है कि समय पर लोन चुका पाएंगे या नहीं. आमतौर पर कोई बैंक या कर्ज देने वाली कंपनी यह देखती है मासिक आमदनी का 45 फीसदी लोन की किस्त (EMI) के रूप में दे पाएंगे या नहीं. लोन की अवधि और ब्याज दर पर भी लोन अमाउंट निर्भर करता है. कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनके बारें में सभी जानना चाहते है. प्रश्नों का यह लिस्ट कई वेबसाइट के कमेंट से लिया गया है.

कितना होम लोन ले सकते हैं?

घर खरीदते समय बैंक 70 से 80 प्रतिशत तक होम लोन देती है. जो बच जाता है वह ग्राहक को डाउन पेमेंट करना है. किसी भी लोन के लिए प्रोसेसिंग फी भी देना होता है. जो 0.25 से 2 प्रतिशत तक रहता है. साथ ही इसमें रजिस्ट्रेशन, ट्रांसफर और स्टांप ड्यूटी जैसे चार्ज भी शामिल होते हैं. कुछ फाइनेंस कंपनी बिल्डर के मिल के 90 से 95 प्रतिशत तक फाइनेंस करवा देते हैं लेकिन ज्यादा से ज्यादा डाउन पेमेंट करने की कोशिश होनी चाहिए. होम लोन देने वाली कंपनी ओर बैंक ब्याज दर कम लेते हैं लेकिन यदि यह लोन लम्बे समय के लिए लिया जाये तो बैंक बहुत ज्यादा ब्याज वसूल लेती है.

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लोन अप्रूवल के लिए कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?

लोन एप्लिकेशन फॉर्म में यह लिखा होता है. इसके साथ कौन – कौन सा डॉक्यूमेंट सबमिट करना होगा. होम लोन के लिए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट का होना बहुत जरूरी है. कुछ कॉमन डॉक्यूमेंट हैं जिनके बारें में सभी को पता है.

  • Address Proof
  • Identity Proof
  • Employment Details
  • Source of income
  • Last Three Years income Tax Return
  • Property Details
  • Bank Statement
  • Guarantor

बैंक लोन के लिए आखिरी तीन साल का Income Tax Return चाहिए. लोन के लिए कुछ न कुछ गिरवी रखनी होगी आपके पास गिरवी के लिए क्या है ओर आप गिरवी में क्या रख सकते हो.

होम लोन में लेने में कितना खर्च होता है?

होम लोन के साथ कई खर्च शामिल हैं. लोन एमाउंट का 0.25 से 2 प्रतिशत तक प्रोसेसिंग फी देना होता है. जिसे कई बार बैंक माफ भी कर देती है. ज्यादा महंगी प्रॉपर्टी के मामले में दो वैल्युएशन की जाती है और निचले वैल्युएशन पर लोन सैंक्शन किया जाता है. कर्ज देने वाली बैंक टेक्निकल इवैल्युएशन फी भी लेती है. बैंक लोन लेने वाले व्यक्ति का Document Verification के लिए दूसरी फर्म को नियुक्त करती हैं, जिसका खर्च लोन लेने वाले को देना होता है.

मासिक किस्त क्या है?

लोन चुकाने के लिए हर महीने बैंक को जो रकम दिया जाता है उसमें ब्याज और मूलधन दोनों होता है, इसे ही मासिक क़िस्त (EMI) कहते हैं.

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लोन की रकम में बदलाव कैसे होता है?

हर महीने ब्याज के साथ मूलधन भी वापिस करना होता है. जो रकम दे दिया गया उसे लोन अमाउंट में से घटा दिया जाता है. वास्तव में हर महीने ब्याज की रकम कम और मूलधन की रकम बढ़ जाती है. लगभग सभी बैंक मंथली रिड्यूसिंग बैलेंस आधारित अप्रोच अपनाते हैं.

बेस रेट क्या है?

एक जुलाई 2010 (एक अप्रैल 2016 के पहले ) के बाद लिए गए सभी होम लोन बेस रेट से लिंक्ड है. इस मामले में बैंकों को यह आजादी है कि वे कॉस्ट ऑफ फंड्स की गणना औसत फंड कोस्ट के हिसाब से करें या एमसीएलआर के हिसाब से करें.

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लोन की राशि कब तक मिलता है?

लोन एक साथ या किस्तों में दिया जाता है. घर बनाने के लिए जो लोन दिया जाता है उसमें किस्तों में लोन दिया जाता है. इसमें तीन किस्तों में पैसा दिया जाता है. घर खरीदने के लिए यह लोन अमाउंट बिल्डर के अकाउंट में ट्रान्सफर किया जाता है जैसे कार बाइक लोन में होता है. सभी डॉक्यूमेंट verification के बाद Acceptance Letter Sign करना होता है इसके बाद Loan Agreement Paper Sign होने के बाद एक से दो दिन में लोन मिल जाता है. रेडी टू मूव प्रॉपर्टी में लोन की रकम एकमुश्त मिल सकती है.

ब्याज दर क्या है?

होम लोन पर ब्याज दर फिक्स्ड या फ्लेक्सिबल हो सकता है. फिक्स्ड में ब्याज दर पहले से तय होता है. जबकि फ्लेक्सिबल में यह बदलती रहती है. इससे EMI घटता – बढ़ता रहता है. जिससे परेशानी हो सकती है. RBI के आदेश से ब्याज दर घटता बढ़ता है जिससे फ्लेक्सिबिलिटी आती है.

मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स आधिरित लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) क्या हैं?

बैंकों द्वारा यह नया तरीका बनाया गया है जिससे वो लोन पर ब्याज दर क्या होना चाहिए? पहले बैंक बेस रेट पर आधारित तरीके से ब्याज दर तय करती थी. लेकिन, अब एमसीएलआर पर आधारित दर पर लोन मिलता है. एमसीएलआर मोड में बैंक एक दिन, एक महीना, तीन महीना, छह महीना, एक साल, तीन साल के लिए एमसीएलआर रेट हर महीना तय कर बैंक स्प्रेड कंपोनेंट जोड़कर ब्याज दर तय करती है. उदहारण के लिए यदि एक साल के लिए किसी बैंक का एमसीएलआर रेट 8 फीसदी और उसका स्प्रेड 0.5 फीसदी है तो वास्तव में लोन पर ब्याज दर 8.5 फीसदी होगी. एमसीएलआर आधारित ब्याज दरों के मामले में बैंक एक साल में इसे रीसेट कर सकते हैं. घटते ब्याज दरों के इस दौर में तिमाही, छमाही रिसेट ऑप्शन बेहतर है, जिस पर आपका बैंक तैयार हो जाये. अगर ब्याज दरें बढ़ने लगती हैं तो इस मामले में आपको नुकसान हो सकता है.

होम लोन पार्ट प्री पेमेंट क्या है?

EMI के अलावे जब कोई रकम लोन अकाउंट में जमा किया जाता है तो यह पार्शियल पेमेंट होता है. यह लोन रकम में से घटा दिया जाता है. जिससे ब्याज कम हो जाता है. ऐसा करने से लोन जल्दी ख़त्म हो सकता है कर्ज जितना जल्दी ख़त्म हो जाये उतनी अच्छी बात है.

क्या चुकाए गए किस्त का डिटेल बैंक देती है?

फाइनेंसियल इयर ख़त्म होते ही हर साल बैंक डॉक्यूमेंट भेजती है जिसमें लोन स्टेटमेंट दिया जाता है. इसे ऑनलाइन भी डाउनलोड कर सकते हो. इस स्टेटमेंट में अब तक कितना लोन और ब्याज लौटा चुके हो और कितना लौटना है वो लिखा होता है.

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लोन अप्रूव होना क्या है?

लोन एप्लीकेशन फॉर्म में डॉक्यूमेंट चेक लिस्ट होता है. जिसे लोन लेते समय जमा करना होता है. आपके द्वारा जमा किये गए कागजों के हिसाब से बैंक लोन देने या नहीं देने का फैसला करती है. यदि बैंक ने आवेदन स्वीकार कर लिया और उस हिसाब से लोन देने का फैसला लिया तो सैंक्शन लेटर में लोन की रकम, अवधि और ब्याज दर आदि के बारे में जानकारी होती है. इसमें ही लोन की शर्त के बारे में जानकारी होती है.

जब आपके हाथ में लोन की रकम आ जाती है तो इसे डिस्बर्समेंट कहते हैं. यह दरअसल तकनीकी, कानूनी और वैल्युएशन संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होता है. सैंक्शन लेटर में जो अमाउंट है, उससे कम लोन लेने का फैसला आप कर सकते हैं. लोन पाते समय आपको अलॉटमेंट लेटर, टाइटल डीड की फोटोकॉपी, सेल एग्रीमेंट और इंकम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट देना पड़ता है. आपके हाथ में जिस दिन लोन की रकम आई, उस दिन से ही उस पर ब्याज लगता है.

समय से पहले आप लोन बंद कर सकते हैं?

जिस अवधि के लिए लोन लिया है, उससे पहले भी इसे बंद कर सकते हैं. अगर आप फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट में हैं तो इसके लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाता, जबकि फिक्स्ड रेट में बैंक चार्ज लगा सकती है.

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होम लोन के लिए इंश्योरेंस लेना चाहिए?

Insurance का मतलब जोखिम को कवर करना है. जब भी होम लोन लिया जाता है जब तक पूरा पैसा बैंक को नहीं चुकाया तब तक घर आपका नहीं है. ऐसे में यह बेहतर विकल्प है. आपकी अनुपस्थिति में यह आपके परिवार के लिए बड़ी राहत हो सकती है. आप इसके लिए प्योर टर्म प्लान ले सकते हैं या मोरगेज इंश्योरेंस प्लान ले सकते हैं. इस तरह के प्लान में सिंगल और रेगुलर प्रीमियम दोनों विकल्प मौजूद हैं.

उम्मीद करता हूँ होम लोन से जुड़ी सभी जानकारी आपको मिल चुकी है. यदि अब भी आपका कोई प्रश्न हो तो कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं.

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Conclusion Home Information

होम लोन के बारें में लगभग सभी जानकारी इस आर्टिकल में दी गई है. यदि कोई बात समझ नहीं आया हो तो कमेंट में पूछ सकते हैं. मुझें आपकी सहायता करने में ख़ुशी होगी. लोन लेने से पहले सभी डॉक्यूमेंट तैयार लार लें और सभी डॉक्यूमेंट के साथ ही बैंक जाएँ.

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2 Comments

  1. Home Loan kisi property ke against me ya ready to move property ke liye milta hai. land purchase karne ke liye home loan nahi milta hai.

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