FIR Full Form FIR Online Kaise Kare in Hindi

FIR Kya Hai Kaise kare FIR ke liye kis document ki jaroorat hoti hai. Kaise Crime Ke liye FIR File Kiya Jata hai Police FIR nahi likhe to kya kare.

कुछ ऐसे जगह हैं जहाँ कोई भी जाना नहीं चाहता है लेकिन कभी न कभी किसी करणवश जाना पड़ता है. इस List में कचहरी (Court), अस्पताल (Hospital) और थाना (Police Station) है.

दूसरे शब्दों में इसे यह भी कह सकते हो “वकील(Advocate) डॉक्टर (Doctor) और पुलिस (Police) तीनो एक ही मुल्क के हैं” इन तीनो से सभी डर लगता है. क्यूंकि इनका काम कुछ और होता है लेकिन ये करते कुछ और हैं. सच्चाई सभी को पता है. यहाँ ज्यादा लिख दिया तो Cold War हो जायेगा.

कभी कोई सामान खो जाने पर या कोई अनहोनी होने पर FIR करवाते हैं. क्या आपको पाता है FIR कैसे करवाते हैं? FIR की प्रक्रिया लोगों को पाता न होने पर कई समस्याओं का सामना करना परता है.

आज के पोस्ट में हमने Online FIR के बारें में बात किया है.

Online FIR Kaise kare
FIR Kya Hai

क्‍या होता है FIR?

जब पुलिस को किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की जानकारी मिलती है, उसके बाद वो जो सबसे पहली लिखित डॉक्‍युमेंट तैयार करते हैं, उसे ही फर्स्‍ट इन्‍फॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) कहते हैं.

इसके नाम से ही पता चल रहा है कि जब पुलिस को किसी वारदात की सबसे पहली जानकारी मिलती है, FIR उसकी पहली रिपोर्ट होती है. यह आमतौर पर किसी पीड़‍ित द्वारा शिकायत के बाद लिखी गई रिपोर्ट होती है.

कोई भी व्‍यक्ति पुलिस से अपने साथ या करीबियों के साथ हुए अपराध की शिकायत मौखिक या लिखित में कर सकता है. पुलिस से कॉल के जरिए भी शिकायत की जा सकती है.

संज्ञेय अपराध में पुलिस के पास किसी व्‍यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है. वे मामले की जांच करने के लिए भी अधिकृत होते हैं. इसके लिए उन्‍हें कोर्ट से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती है.

असंज्ञेय अपराध में पुलिस के पास न तो किसी व्‍यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होता और न ही वे मामले की जांच कर सकते हैं.

FIR का क्‍या महत्‍व है?

किसी भी अपराध या वारदात की जांच में FIR सबसे जरूरी डॉक्‍युमेंट होता है क्‍योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई इसी के आधार पर की जाती है. एफआईआर लिखने के बाद ही पुलिस मामले की जांच शुरू करती है.

FIR दर्ज कराने का प्रोसेस क्‍या है?

दण्‍ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के सेक्‍शन 154 में FIR का जिक्र है. जब कोई व्‍यक्ति किसी वारदात/घटना/अपराध की जानकारी मौखिक रूप से देता है तो पुलिस उसे लिखती है.

शिकायतकर्ता या जानकारी देने वाले नागरिक के तौर पर यह आपका हक बनता है कि आपने जो मौखिक जानकारी दी है, पुलिस उसे लिखने के बाद आपको पढ़कर सुनाए. आपके द्वारा दी गई जानकारी को पुलिस द्वारा लिखने के बाद इसपर आपका साइन किया जाना जरूरी है.

आपको इस रिपोर्ट तभी साइन करना चाहिए, जब आपको लगे कि पुलिस ने आपके द्वारा दी गई जानकारी ठीक लिखा है, आपके कथन या तथ्‍यों को तोड़-मरोड़कर नहीं लिखा गया है.

जो लोग ल‍िख या पढ़ नहीं सकते हैं, वे इस रिपोर्ट पर अंगूठे का निशान लगा सकते हैं. FIR दर्ज कराने के बाद उसकी एक कॉपी जरूर प्राप्‍त करनी चाहिए. FIR की कॉपी ब‍िल्‍कुल मुफ्त में प्राप्‍त करना आपका अधिकार है.

FIR में किस तरह की जानकारी देनी चाहिए?

FIR में आपका नाम, पता, तारीख, समय, रिपोर्टिंग की जगह आदि के बारे में जानकरी होनी चाहिए. वारदात/घटना/अपराध की सच्‍ची जानकारी व तथ्‍य, शामिल व्‍यक्तियों के नाम व अन्‍य जानकारी और अगर कोई चश्‍मदीद है तो उनकी जानकारी भी FIR में देनी चाहिए.

FIR दर्ज कराते समय आपको कोई भी गलत जानकारी या तथ्‍यों को तोड़-मरोड़कर नहीं बतानी चाहिए. भारतीय दंड संहिता, 1860 के सेक्‍शन 203 के तहत इसके लिए आप पर कार्रवाई की जा सकती है. इसमें कोई बयान ऐसा बयान भी नहीं होना चाहिए, जिसके बारे में आपको कोई स्‍पष्‍ट जानकारी नहीं हो.

FIR Online Kaise Kare

कुछ महीने पहले मेरा SIM खो गया था. Duplicate SIM के लिए BSNL Office गया वहाँ FIR Copy का demand कर दिया गया. FIR के लिए थाना गया तो 200 रुपए का Demand FIR Copy चाहिए तो 200 रुपए दो.

जब मैं उनसे 200 रुपए का Receipt देने को बोला तो उसने FIR Copy देने से माना कर दिया. उसके बाद जब मैं Continuously BSNL Office Visit किया उसने कुछ Details लिया वो उनके Database से Match हो गया और मुझे मेरा SIM मिल गया.

FIR Full FORM

  • क्या आप जानते हो FIR Full form क्या होती है ?
  • FIR hindi meaning क्या होता है ?
  • FIR – First Information Report
  • FIR क़ानूनी कार्यवाई जिससे Police थाने में Report दर्ज कराइ जाती हे.
  • इसके लिए अपराध और अपराधी दोनों के बारे में Written Application Police Station Incharge को देना होता है.
  • इसे हिंदी में “प्राथमिकी या प्रथम सूचना रपट” बोलते हैं.
  • एक लिखित प्रपत्र (डॉक्युमेन्ट) है जो भारत, पाकिस्तान, एवं जापान आदि की पुलिस द्वारा किसी संज्ञेय अपराध (cognizable offence) की सूचना प्राप्त होने पर तैयार किया जाता है.
  • किसी भी अपराधी को सजा दिलाने के लिए पीड़ित द्वारा FIR FILE करने के बाद ही Police अपनी कार्यवाई को आगे बढाती है.
  • FIR दर्ज होने के बाद उसमे कुछ बदला नहीं जा सकता हे.

Why FIR File

  • FIR एक ऐसी सुविधा है जिससे पीड़ित इन्साफ के लिए Police Station में लिखित प्रपत्र (Written Document) देता है और जो भी उसके साथ हुआ है वो सब उस दस्तावेज में लिखा होता है.
  • इसकी एक Copy पीड़ित को दी जाती है और Orginal Police Station में रखा जाता है.
  • FIR Report के आधार पर Police अपनी कार्यवाई आगे बढाती है और अपराधी को Arrest करने के लिए Warrant तैयार करती है.
  • FIR सिर्फ अपराधियो के लिए नही बल्कि किसी के खोने का भी करवा सकते हैं.
  • जैसा मैं ऊपर बताया हूँ मेरा SIM खोया तो Duplicate SIM के लिए FIR Copy जी जरूरत थी.
  • ऐसे FIR दर्ज करवाने के लिए कुछ प्रश्न पूछा जाता है.
    • समान किस दिन खोया
    • कहा खोया
    • सभी जानकारी FIR रिपोर्ट में लिखी जाती हे.
  • जरुरी Documents भी खोने पर भी Fir दर्ज जरूरी होता है.

FIR Related Some Query

FIR File कौन करवा सकता है

  • व्यक्ति जो या तो किसी अपराध का शिकार हुआ हो या फिर उसने अपराध को होते हुए अपनी आँखों से देखा हो या फिर वो कोई भी व्यक्ति जिसे उस अपराध के बारे में जानकारी हो.

FIR Filing क्यूँ

  • गुनाहगार की पहचान और उसे सजा दिलवाने के लिए यह पहला कदम है.
  • यदि मामला चोरी से या डकैती (Robbery) से जुड़ा है तो Insurance Company से कंपनसेशन के लिए FIR बहुत जरूरी है
  • यदि प्रॉपर्टी या सामान का किसी अपराध में misuse किया जाता है ऐसी स्थिति में पुलिस को FIR के माध्यम से अवगत करवाना बहुत जरूरी है
  • यदि मोबाइल खो जाता है तो सुरक्षा के लिए FIR बहुत जरूरी है. खोये हुए Mobile की Misuse होने से आपको कोई परेशानी नहीं होगी या कम होगी.

FIR की जरूरत

  • पुलिस ऐसे अपराधो के लिए FIR दर्ज करती है जो पहली नजर में संज्ञेय अपराधों (cognizable offences ) कि श्रेणी में आते हों.
  • इसमें बिना वारंट पुलिस अपराधी को गिरफ्तार कर सकती है.
  • संज्ञेय अपराधों (cognizable offences ) कि श्रेणी में हत्या, बलात्कार, चोरी और किसी पर हमला (Murder, Rape, Theft, Attack, etc.) इन मामलो में पुलिस बिना किसी वारंट के अपराधी को गिरफ्तार कर सकती है.
  • ऐसे मामले जो इस श्रेणी में नहीं आते जैसे Bigamy or Defamation (द्विविवाह या मानहानि) इन मामलो में पुलिस बिना वारंट के किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है.
  • ऐसी स्थिति में पुलिस FIR दर्ज नहीं करती लेकिन आगे की कार्यवाही के लिए शिकायत न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेज देती है.

FIR कब किया जाता है

  • FIR जितने कम से कम समय में हो सके दर्ज करवाया जाना आवश्यक है
  • देर होने से परेशानी हो सकती है.
  • इसमें देर होने से पीड़ित संदेह के दायरे में आ सकता है.
  • ऐसे Cases में यह एक साजिश समझा जा सकता है.

अगर आपका FIR दर्ज नहीं किया जा रहा तो क्‍या करना चाहिए?

अगर पुलिस स्‍टेशन में आपका FIR दर्ज नहीं किया जा रहा है तो आप पुलिस सुपरिटेंडेंट (SP) या इससे ऊपर डिप्‍टी इंस्‍पेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG) और इंस्‍पेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) से शिकायत कर सकते हैं.

आप इन अधिकारियों को अपनी शिकायत लिखित रूप में पोस्‍ट के जरिए भेज सकते हैं. वे अपने स्‍तर पर से इस मामले की जांच करेंगे या जांच का निर्देश देंगे. आप चाहें तो प्राइवेट स्‍तर पर अधिकार-क्षेत्र में आने वाले कोर्ट में भी इसकी शिकायत कर सकते हैं.

FIR दर्ज कराने के बाद भी पुलिस कब मामले की जांच नहीं कर सकती है?

आपके द्वारा FIR दर्ज कराने के बाद पुलिस मामले की जांच तब नहीं करती है, जब केस बहुत गंभीर न हो या पुलिस को लगे कि उक्‍त मामले के जांच के लिए कोई पर्याप्‍त कारण नहीं है.

हालांकि, इसके लिए पुलिस को रिकॉर्ड करना होता है कि वो क्‍यों इस मामले की जांच नहीं कर रहे हैं. उन्‍हें इस बारे में आपको जानकारी भी देनी होती है.

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Summary

जब कभी हमारा या आस पड़ोस में किसी बात को लेकर विवाद हो जाता है या किसी गंभीर दुर्घटना हो जाती है तो हम पुलिस के पास जाते हैं और उस घटना की जानकारी देते हैंं या फिर किसी के खिलाफ विरोध दर्ज़ कराते हैंं. इसी को FIR  कहा जाता है.

आसान शब्दों में बोले तो किसी अपराध की जानकारी पुलिस स्टेशन में देने को FIR ( First Information Report) कहा जाता है. यदि हम और डिटेल्स में बात करे तो FIR के बारे में हमारे The Code of Criminal Procedure ,1973 में धारा 154 और 155 में बताई गयी है.

हमरे कानून की किताब में चाहे वो Indian Constitutions,  Indian Penal Code हो या कोई और सभी को इस प्रकार से लिखा गया है है जिसे आम आदमी समझ ही नहीं सकता इसी का लाभ कुछ पुलिस वाले उठाकर लोगों को गुमराह करते हैं.

हमारे Act की भाषा बहुत ही जटिल है जिसे समझने और न्यायालय में लड़ने के लिए वकीलो की सहायता लेनी  परती है.

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Ashu Garg

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4 thoughts on “FIR Full Form FIR Online Kaise Kare in Hindi

  1. Sir ji, mere relative kanmobile chori ho gya tha Kuch din pehle FIr k liye najdiki ghatna sthal par police station par samrk kiia too mobile bill or documents ke abhav main sath hi unka resident jila alag hone k Karan unhone report dark nhi ki or kaha AAP Apne jile me xarj karye ab hamne waha bi report card karwa so Jo kinab sambdhit police station par AA Gyi hai para to Abhi wo darj nhi Kar rhe hai fir or bolA shikayat Karta ko aane padega? Toh Mera sawal ye hai ki Kya main online fir darj Kar sakta hu Kya ? Kya wo valid hai ? Kya us par karwayi hogi? Ya ab bhi online darj karne me baad bhi ghatna sathal se sambdhit police station par sikayat Karta ko Jana padega? Please Kuch jaankari deve.

    1. Pushpendra Ji आपके प्रश्न का देर से जवाब देने के लिए क्षमा चाहता हूँ. यदि पुलिस स्टेशन FIR नहीं लिख रहा है तो उसके खिलाफ SP Office में शिकायत कर सकते हैं. अपने फ़ोन के लिए Online FIR भी करवा सकते हैं. Online FIR पर कार्यवाही की जाती है और यह Offline से ज्यादा असरदार है. थाना में रिपोर्ट करवाने के लिए आप एक एप्लीकेशन जिला SP और DM के नाम लिखिए जिसमें अपने खोये हुए मोबाइल और थाना आपके शिकायत को नहीं लिखा इसके बारें में भी लिखिए और इसे Speed Post मतलब डाकघर (Post Office) से SP और DM को भेज दीजिये. इसके लिए IG और DIG के नाम से भी एप्लीकेशन लिख कर भेज सकते हैं.

  2. Bhut useful jankari . Guruji search consol me blocked resources ki problem Aa gyi hai kafi logo se pucha solve nhi kar paya hoon . S.pubmine kon hr pta nhi ye nam host ke roop me aa rha hai. 112 me se 91 post block hai kafi dino se preshan hoon aur blog ko band krne ki soch rha hoon please help me

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