FIR Full Form FIR Online Kaise Kare in Hindi

FIR Kya Hai Kaise kare FIR ke liye kis document ki jaroorat hoti hai. Kaise Crime Ke liye FIR File Kiya Jata hai Police FIR nahi likhe to kya kare.

कुछ ऐसे जगह हैं जहाँ कोई भी जाना नहीं चाहता है लेकिन कभी न कभी किसी करणवश जाना पड़ता है. इस List में कचहरी (Court), अस्पताल (Hospital) और थाना (Police Station) है. दुसरे शब्दों में इसे यह भी कह सकते हो “वकील(Advocate) डॉक्टर (Doctor) और पुलिस (Police) तीनो एक ही मुल्क के हैं” इन तीनो से सभी डर लगता है. क्यूंकि इनका काम कुछ और होता है लेकिन ये करते कुछ और हैं. सच्चाई सभी को पता है. यहाँ ज्यादा लिख दिया तो Cold War हो जायेगा.

Guruji Tips FIR Online Kaise Kare

Online FIR Kaise kare

कुछ महीने पहले मेरा SIM खो गया था. Duplicate SIM के लिए BSNL Office गया वहाँ FIR Copy का demand कर दिया गया. FIR के लिए थाना गया तो 200 रुपए का Demand FIR Copy चाहिए तो 200 रुपए दो. जब मैं उनसे 200 रुपए का Receipt देने को बोला तो उसने FIR Copy देने से माना कर दिया. उसके बाद जब मैं Continously BSNL Office Visit किया उसने कुछ Details लिया वो उनके Database से Match हो गया और मुझे मेरा SIM मिल गया.

FIR Full FORM

  • क्या आप जानते हो FIR Full form क्या होती है ?
  • FIR hindi meaning क्या होता है ?
  • FIR – First Information Report
  • FIR क़ानूनी कार्यवाई जिससे Police थाने में Report दर्ज कराइ जाती हे.
  • इसके लिए अपराध और अपराधी दोनों के बारे में Written Application Police Station Incharge को देना होता है.
  • इसे हिंदी में “प्राथमिकी या प्रथम सूचना रपट” बोलते हैं.
  • एक लिखित प्रपत्र (डॉक्युमेन्ट) है जो भारत, पाकिस्तान, एवं जापान आदि की पुलिस द्वारा किसी संज्ञेय अपराध (cognizable offence) की सूचना प्राप्त होने पर तैयार किया जाता है.
  • किसी भी अपराधी को सजा दिलाने के लिए पीड़ित द्वारा FIR FILE करने के बाद ही Police अपनी कार्यवाई को आगे बढाती है.
  • FIR दर्ज होने के बाद उसमे कुछ बदला नहीं जा सकता हे.

Why FIR File

  • FIR एक ऐसी सुविधा है जिससे पीड़ित इन्साफ के लिए Police Station में लिखित प्रपत्र (Written Document) देता है और जो भी उसके साथ हुआ है वो सब उस दस्तावेज में लिखा होता है.
  • इसकी एक Copy पीड़ित को दी जाती है और Orginal Police Station में रखा जाता है.
  • FIR Report के आधार पर Police अपनी कार्यवाई आगे बढाती है और अपराधी को Arrest करने के लिए Warrant तैयार करती है.
  • FIR सिर्फ अपराधियो के लिए नही बल्कि किसी के खोने का भी करवा सकते हैं.
  • जैसा मैं ऊपर बताया हूँ मेरा SIM खोया तो Duplicate SIM के लिए FIR Copy जी जरूरत थी.
  • ऐसे FIR दर्ज करवाने के लिए कुछ प्रश्न पूछा जाता है.
    • समान किस दिन खोया
    • कहा खोया
    • सभी जानकारी FIR रिपोर्ट में लिखी जाती हे.
  • जरुरी Documents भी खोने पर भी Fir दर्ज जरूरी होता है.

यह भी पढ़ें

Top 10 Benefits of Government Job

Aadhar Card Apply karne ke liye Document List

Top 10 Interesting Fact About Dream !

Top 10 Interesting Facts of Indian Currency

FIR Related Some Query

FIR File कौन करवा सकता है

  • व्यक्ति जो या तो किसी अपराध का शिकार हुआ हो या फिर उसने अपराध को होते हुए अपनी आँखों से देखा हो या फिर वो कोई भी व्यक्ति जिसे उस अपराध के बारे में जानकारी हो.

FIR Filing क्यूँ

  • गुनाहगार की पहचान और उसे सजा दिलवाने के लिए यह पहला कदम है.
  • यदि मामला चोरी से या डकैती (Robbery) से जुड़ा है तो Insurance Company से कंपनसेशन के लिए FIR बहुत जरूरी है
  • यदि प्रॉपर्टी या सामान का किसी अपराध में misuse किया जाता है ऐसी स्थिति में पुलिस को FIR के माध्यम से अवगत करवाना बहुत जरूरी है
  • यदि मोबाइल खो जाता है तो सुरक्षा के लिए FIR बहुत जरूरी है. खोये हुए Mobile की Misuse होने से आपको कोई परेशानी नहीं होगी या कम होगी.

FIR की जरूरत

  • पुलिस ऐसे अपराधो के लिए FIR दर्ज करती है जो पहली नजर में संज्ञेय अपराधों (cognizable offences ) कि श्रेणी में आते हों.
  • इसमें बिना वारंट पुलिस अपराधी को गिरफ्तार कर सकती है.
  • संज्ञेय अपराधों (cognizable offences ) कि श्रेणी में हत्या, बलात्कार, चोरी और किसी पर हमला (Murder, Rape, Theft, Attack, etc.) इन मामलो में पुलिस बिना किसी वारंट के अपराधी को गिरफ्तार कर सकती है.
  • ऐसे मामले जो इस श्रेणी में नहीं आते जैसे Bigamy or Defamation (द्विविवाह या मानहानि) इन मामलो में पुलिस बिना वारंट के किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है.
  • ऐसी स्थिति में पुलिस FIR दर्ज नहीं करती लेकिन आगे की कार्यवाही के लिए शिकायत न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेज देती है.

FIR कब किया जाता है

  • FIR जितने कम से कम समय में हो सके दर्ज करवाया जाना आवश्यक है
  • देर होने से परेशानी हो सकती है.
  • इसमें देर होने से पीड़ित संदेह के दायरे में आ सकता है.
  • ऐसे Cases में यह एक साजिश समझा जा सकता है.

FIR कहाँ दर्ज करवा सकते हैं

  • घटनास्थल जिस थाना क्षेत्र में आता है FIR उसी थाना में दर्ज करवाई जाती है.
  • लेकिन इमरजेंसी की स्थिति होती है तो किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाई जा सकती है.
  • उसके बाद थानाधिकारी उसे संबंधित थाना क्षेत्र में करवाई के लिए ट्रान्सफर कर देता है.
  • अब Phone Call या Email के जरिये भी FIR करवाया जा सकता है.

कैसे करवाएं FIR

  • FIR दर्ज करवाने के लिए अपराध की तिथि और घटना स्थल का विधिवत विवरण दिया जाता है
  • यदि अपराधियों की पहचान है तो उस सम्न्धित चिन्ह भी FIR में लिखवाया जाता है.
  • FIR Copy जरूर receive कर लें.
  • FIR Copy पर FIR नंबर होता है.
  • Future Reference के लिए इसे सम्भाल कर रखना चाहिए.

FIR कैसे लिखें

कुछ लोगों की शिकायत होती है उनकी FIR थाने में नहीं लिखी गई, या फिर मजिस्ट्रेट के यहाँ FIR आवेदन निरस्त हो गया है. इसके कई कारण में से एक लिखने का तरीका भी है. FIR कम से कम शब्दों में स्पष्ट और पूरे वारदात को लिखना चाहिये. क्योंकि न्यायालय में केस इसी आधार पर चलता है. कई बार पढ़े लिखे लोग भी FIR लिखने में गलती कर देते है.

  1. कब (तारीख और समय)
  2. कहा (जगह)
  3. किसने : अपराध किस व्यक्ति ने किया ( ज्ञात या अज्ञात) एक या अनेक ब्यक्ति उसका नाम पता
  4. किसको : किसके साथ अपराध किया गया एक पीड़ित है या अनेक उन सब का नाम व पता
  5. किसलिये : इसीसे पता चलता है कार्य अपराध या पुरस्कार देने के लायक है. Example
    1. A, B पर गोली चला देता है और B की मृत्यु हो जाती है, A यहाँ पर दोषी होगा.
    2. A, B पर अपनी पिस्तौल तान देता है और B अपने बचाव में A पर गोली चला देता है जिससे A की मृत्यु हो जाती है. B हत्या का दोषी नहीं है क्योंकि अपनी आत्मरक्षा करते हुए यदि आप किसी की जान भी ले लेते है तो आप दोषी नहीं होंगे.
    3. A अपनी कार से B को टक्कर मार देता है और B की मृत्यु हो जाती है. A हत्या का दोषी नहीं है बल्कि उसपर दुर्घटना का केस चलेगा और उसके हिसाब से दण्ड मिलेगा.
    4. A एक पुलिस कर्मी है और वह आतंकवादी संगठन के मुठभेड़ में एक या कई आतंकवादीयो को मार देता है. A हत्या का दोषी नहीं होगा बल्कि उसे पुरस्कार दिया जायेगा
    5. “इससे यह स्पष्ट होता है की कोई भी कार्य तब तक अपराध नहीं है जब तक की दुराशय से न किया गया हो।“
  6. किसके सामने (गवाह) : अगर घटना के समय कोई मौजूद हो तो उनकी जानकारी अवश्य देनी चाहिये.
  7. किससे (हथियार) : अपराध करने के लिए किस हथियार का प्रयोग किया गया (पिस्तौल, डंडे, रॉड, चैन, ईट) अगर कोई धोखाधड़ी का मामला है तो आप (स्टाम्प पेपर, लेटरहेड, इंटरनेट , मोबाइल, आदि,) जानकारी जरूर प्रदान करे.
  8. किस प्रकार : क्या प्रकरण अपनाया गया अपराध करने के लिये उसे लिखें.
  9. क्या किया ( अपराध) : इनसभी को मिलाकर क्या किया गया जो की अपराध होता है उसे लिखें.

Hot Trending Topic :

Domestic Violence Helpline Number in India

Domestic Violence (घरेलु हिंसा) in India in Hindi

शाम के बाद महिलाओं के साथ ऐसा नहीं कर सकते हैं !

Police, FIR और गिरफ़्तारी से जुड़ी हुई महिलाओं के अधिकार !

After FIR

  • सामान्य स्थिति में पुलिस Case की जाँच पड़ताल कर सभी गवाहों के बयान और अन्य सारे कानूनी कारवाई कर Final report तैयार करती है.
  • यदि पर्याप्त सबूत और गवाहों की कमी है तो पुलिस उस पर किये जाने वाली कारवाई को रोक सकती है.
  • ऐसे में Case दर्ज करवाने वाले को सूचित कर दिया जाता है.
  • लेकिन यदि Case बढाने के लिए पर्याप्त सबूत है तो उसकी final charge sheet कोर्ट में जमा कर देती है.
  • इसके बाद अपराधी का Trial शुरू होता है.

Note यदि पुलिस FIR लिखने से मना कर देती है तो उसकी शिकायत लिखित में Superintendent of Police को की जा सकती है. उसके अलावा न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी लिखित में अपनी शिकायत दे सकते है.

Always Remember

  • अपराध किसी के साथ कंही भी हो सकता है.
  • जागरूक नागरिक होने के नाते सजग रहना चाहिए.
  • आपके सामने हो रहे अपराध के लिए Police को जाँच में सहयोग करें.
  • पीड़ित के लिए जरुरी नैतिक जिम्मेदारी अगर आप निभा सकते हैं तो अवश्य निभाएं.

इस जानकारी को जुटाने क लिए अत्यधिक सावधानी बरती गयी है कई Website और Blog को Follow किया गया है. गलती होने की संभावना हो सकती है. इस जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार जानो के साथ Share करें.

पुलिस कई बार किसी घटना को अपने कार्य क्षेत्र की सीमा के बाहर का बता कर कार्यवाही करने से मना कर देती हैऐसे में क्या करें ?

  • आज भी अच्छे और इमानदार पुलिस ऑफिसर्स है !
  • लेकिन कानून की जिम्मेदारी लेने वाले ही कानून का सम्मान नहीं करते हैं !
  • इसी वजह से भारतीय पुलिस व्यवस्था सबसे ज्यादा बदनाम हो चुकी है.
  • ऐसी घटनाएँ पुलिस महकमें में संवेदनहीनता और वेपरवाही को दर्शाती है !
  • जहाँ पुलिस को नागरिकों की मदद के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए, वही पुलिस नाकामी के के बहाने ढूढती है !
  • कभी कार्य क्षेत्र सीमा तो कभी कभी कम्प्लेंन भी लेने से मना कर देती है या फिर कभी फटकार कर भगा देती है !
  • कई बार पुलिस के व्यवहार से शिकायतकर्ता खुद को आरोपी महसूस करता है !
  • ऐसे व्यवहार करने वाले पुलिस अधिकारी पर कारवाई होनी चाहिए !
  • ऐसी स्थिति में रेंज के D.I.G. जिसे दिल्ली या दुसरे प्रदेशो में में जॉइंट कमिश्नर (Joint Commissioner ) के नाम से जाना जाता है. उनसे मिले और किसी अच्छी NGO से मदद मांगे या कोर्ट में एप्लीकेशन लगाये.
  • यदि पुलिस अधिकारी घटना अपने कार्य क्षेत्र की सीमा के बाहर कहकर वापस कर देता है या आवश्यक कारवाई करने से मना करता है तो ऑडियो या विडिओ बनाये और एंटी करप्शन कौंसिल ऑफ़ इंडिया को को प्रषित करे !

यदि फिर भी कोई परेशानी है तो संपर्क कर सकते हैं.

Advocate Dheeraj Kumar

Chamber Number – 826, Lawyer’s Building, Dwarka Court Complex, Sector 10

Dwarka New Delhi – 110075

Mobile Number – 0 9873 888 444

You May Also Read

गूगल यूजर को कैसे ट्रैक करता है How Google Track User

Top 10 Interesting Fact about You Tube (योउ तुबे)

5 बातें जो आपको सफल होने से रोकते हैं उनसे कैसे बचें

Top 10 Interesting Fact about You Tube

दुनिया के 10 देश जहाँ भारतीय कर सकते हैं सस्ते में सैर

Bank Account me Aadhaar Card Kaise Link Kare

 

Subscribe for Quick Update

About the Author: Guruji Tips

Guruji Tips is a website to provide tips related to Blogging, SEO, Social Media, Business Idea, Marketing Tips, Make Money Online, Education, Interesting Facts, Top 10, Life Hacks, Marketing, Review, Health, Insurance, Loan and Internet-related Tips. यदि आप भी अपना Content इस Blog के माध्यम से publish करना चाहते हो तो कर सकते हो. इसके लिए Join Guruji Tips Page Open करें. आप अपना Experience हमारे साथ Share कर सकते हो. धन्यवाद !
loading...

Related Post

4 Comments

  1. Sir ji, mere relative kanmobile chori ho gya tha Kuch din pehle FIr k liye najdiki ghatna sthal par police station par samrk kiia too mobile bill or documents ke abhav main sath hi unka resident jila alag hone k Karan unhone report dark nhi ki or kaha AAP Apne jile me xarj karye ab hamne waha bi report card karwa so Jo kinab sambdhit police station par AA Gyi hai para to Abhi wo darj nhi Kar rhe hai fir or bolA shikayat Karta ko aane padega? Toh Mera sawal ye hai ki Kya main online fir darj Kar sakta hu Kya ? Kya wo valid hai ? Kya us par karwayi hogi? Ya ab bhi online darj karne me baad bhi ghatna sathal se sambdhit police station par sikayat Karta ko Jana padega? Please Kuch jaankari deve.

    1. Pushpendra Ji आपके प्रश्न का देर से जवाब देने के लिए क्षमा चाहता हूँ. यदि पुलिस स्टेशन FIR नहीं लिख रहा है तो उसके खिलाफ SP Office में शिकायत कर सकते हैं. अपने फ़ोन के लिए Online FIR भी करवा सकते हैं. Online FIR पर कार्यवाही की जाती है और यह Offline से ज्यादा असरदार है. थाना में रिपोर्ट करवाने के लिए आप एक एप्लीकेशन जिला SP और DM के नाम लिखिए जिसमें अपने खोये हुए मोबाइल और थाना आपके शिकायत को नहीं लिखा इसके बारें में भी लिखिए और इसे Speed Post मतलब डाकघर (Post Office) से SP और DM को भेज दीजिये. इसके लिए IG और DIG के नाम से भी एप्लीकेशन लिख कर भेज सकते हैं.

  2. Bhut useful jankari . Guruji search consol me blocked resources ki problem Aa gyi hai kafi logo se pucha solve nhi kar paya hoon . S.pubmine kon hr pta nhi ye nam host ke roop me aa rha hai. 112 me se 91 post block hai kafi dino se preshan hoon aur blog ko band krne ki soch rha hoon please help me

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *